कारोबारियों के 2 बार प्रदर्शन से बैकफुट पर निगम, शिफ्टिंग का प्लान तक तैयार नहीं कर पाए अफसर

भास्कर न्यूज | अमृतसर पंजाब सरकार ने वाल्ड सिटी को पवित्र जगह घोषित करते हुए तंबाकू-मीट की दुकानें हटाने का आदेश जारी किया था। मगर कारोबारियों के 2 बार विरोध प्रदर्शन से निगम बैकफुट पर आ गया। सरकार से आदेश जारी होने के 45 दिन के बाद भी दुकानें शिफ्ट करने का कोई प्लान अफसर तैयार नहीं कर पाए हैं। बता दें कि शुरूआत में ज्वाइंट कमिश्नर ने अफसरों संग मीटिंग कर सर्वे कराने का निर्देश दिया था। जिसके बाद एस्टेट विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में 107 खोखे सिगरेट-तंबाकू के तो 34 कच्चे मीट की दुकानें सामने आई थी। जबकि कोई भी शराब की दुकानें व अहाता नहीं पाए गए। .मीट की दुकानें खोलने को निगम की तरफ से शुल्क लेकर लाइसेंस जारी किया जाता है। ऐसे में पहले दुकानें शिफ्ट करने के लिए नोटिस जारी करना चाहिए था। .दुकानें शिफ्ट कराने को उचित जगह तलाश करने के बाद कारोबारियों से मीटिंग करनी चाहिए थी। . सिगरेट-तंबाकू की दुकानें हटवाने के लिए कारोबारियों को आसानी से जगह उपलब्ध कराई जा सकती थी मगर ध्यान नहीं दिया गया। सरकार के आदेश मीट के सेल-परजेच के अलावा यूज करना बैन किया गया है लेकिन यह बताया गया कि लोग घरों में भी मीट मंगवा सकेंगे या नहीं। ज्वाइंट कमिश्नर जय इंद्र ने बीते 15 दिसंबर को मीटिंग की थी कि सरकार ने वॉल्ड सिटी को पवित्र शहर घोषित करने का नोटिफिकेशन जारी किया गया है। वॉल्ड सिटी में सभी मीट-शराब, तंबाकू एवं शराब की दुकानें स्थानांतरित कराई जाएंगी जिसे लेकर सर्वे कराया जाए ताकि इन्हें वॉल्ड सिटी से बाहर किया जा सके। वाल्ड सिटी को पवित्र शहर घोषित किए जाने के मांस, मछली, तंबाकू और शराब की दुकानों का संचालन प्रतिबंधित है। कारोबारियों ने आरोप लगाया कि बरसों से जो लोग कारोबार कर रहे अचानक ही अपनी दुकानें कैसे शिफ्ट करेंगे। मेयर जतिंदर सिंह भाटिया से बीते 24 दिसंबर को मुलाकात कर डिमांड रखी थी कि शिफ्ट करने के लिए जगह उपलब्ध कराई जाए और पर्याप्त समय भी दें। यदि निगम अफसर कारोबारियों की डिमांड पर ध्यान देता तो सरकार के आदेशों का पालन कराने में मुश्किलें नहीं आती। फिलहाल, पवित्र शहर घोषित किए जा चुके वाल्ड सिटी के 12 गेटों से खोखों और मीट की दुकानों को हटा पाने की कार्रवाई अब सिर्फ कागजों में सिमटकर रह गई है। बता दें कि मीट कारोबारियों ने दुकानें हटाए जाने के विरोध में बीते 30 दिसंबर को डीसी ऑफिस के बाहर तो 25 दिसंबर को गोलबाग में एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया था। जिसके बाद से निगम अफसर बैकफुट पर आ गए।

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