प्रयागराज महाकुंभ अपने अंतिम चरण में है। तमाम विदेशी श्रद्धालु भी महाकुंभ पहुंच रहे हैं। बुधवार को नार्वे, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और नेपाल से आए श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया। नॉर्वे के पूर्व जलवायु और पर्यावरण मंत्री एरिक सोलहेम ने कहा- महाकुंभ अद्वितीय है। यह न केवल विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन, बल्कि इतिहास का सबसे विशाल मानव समागम भी है। मानव इतिहास में इससे बड़ा कोई आयोजन कभी नहीं हुआ। चाहे अमेरिका हो या यूरोप, चीन या कहीं और, इतने कम समय में 400 मिलियन लोग देवताओं की पूजा करने के लिए एक साथ नहीं आए। बेल्जियम के एडवर्ड ने कहा- वर्तमान में यह दुनिया में सबसे अच्छी जगह है। महाकुंभ का अनुभव सुंदर और शानदार है। यहां की भीड़ और लोग बहुत मिलनसार हैं। यह आज दुनिया में सबसे अच्छी जगह है। यहां जो दिख रहा वह अद्भुत
फ्रांस के एक अन्य श्रद्धालु ने कहा- यह बहुत बढ़िया जगह है। यहां आना अद्भुत है, यहां जो कुछ भी हम देखते हैं, वह अद्भुत है। हम साधु-संतों का इंतजार कर रहे हैं। गंगा में डुबकी लगाना अविश्वसनीय अनुभव था
संगम स्नान के बाद विदेशी श्रद्धालु ने कहा- गंगा में पवित्र डुबकी लगाना एक अविश्वसनीय अनुभव था। यह अद्भुत है और हम यहां जो महसूस कर रहे हैं, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। ऑस्ट्रेलिया से आए एक श्रद्धालु ने कहा- मैं यहां आने की खुशी और कृतज्ञता को शब्दों में बयां नहीं कर सकता। यह जीवन भर याद रहने वाला अनुभव है। नेपाल से आए भक्त ने कहा- महाकुंभ में बहुत अच्छी व्यवस्था है। हमने यहां आने का कभी सोचा नहीं था, लेकिन भगवान ने बुला लिया। स्नान करने के बाद मन प्रसन्न है। इंटरनेशनल मीडिया में महाकुंभ छाया प्रयागराज महाकुंभ की कवरेज इंटरनेशनल मीडिया भी कर रहे हैं। द गार्जियन ने इसे 144 वर्षों में पहली बार आयोजित होने वाला महाकुंभ बताया। लिखा- यह पर्व हिंदू धर्म के लिए विशेष महत्व रखता है। अल जजीरा ने इसे पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हजारों हिंदुओं का मेला कहा। वहीं, इंडिपेंडेंट ने इसे मानवता का सबसे बड़ा जमावड़ा बताया। रॉयटर्स ने महाकुंभ को गिगांटिक पिचर फेस्टिवल का नाम दिया, जबकि द गार्जियन ने इसे अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव बताया। महाकुंभ में 68 विदेशियों ने सनातन धर्म अपनाया प्रयागराज महाकुंभ के सेक्टर-17 में निर्मोही अनी अखाड़े से जुड़ीं साईं मां का आश्रम है। मंगलवार को यहां 68 विदेशी नागरिकों ने विधि-विधान से सनातन धर्म अपना लिया। इनमें सबसे बड़ी संख्या अमेरिकी नागरिकों की रही। सनातन अपनाने वालों में 41 अमेरिका, 7 ऑस्ट्रेलिया, 4 स्विट्जरलैंड, 3 फ्रांस, 3 बेल्जियम, 2 यूके, 2 आयरलैंड, 2 कनाडा और नॉर्वे, जापान, इटली और जर्मनी के एक-एक नागरिक शामिल हैं। विदेशी श्रद्धालुओं को सनातन शांति की यह राह जगतगुरु साईं मां लक्ष्मी देवी दिखा रही हैं। उन्होंने कहा- जीवन में शांति तलाशते विदेशियों को सनातन में आकर शांति का अनुभव हो रहा है। सनातन की राह में शामिल होने के बाद उनके चेहरे पर मुस्कुराहट है। दिमाग शांत है, मन की उथल-पुथल समाप्त हो चुकी है। उन्हें अब जीवन में एक राह मिल चुकी है। पढ़ें पूरी खबर… अब तक 48 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने किया स्नान
महाकुंभ में माघ पूर्णिमा का स्नान जारी है। संगम से 15 किमी तक चारों तरफ श्रद्धालुओं की भीड़ है। शाम 4 बजे तक 1.94 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं। अनुमान है कि आज 2.5 करोड़ श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे। श्रद्धालुओं पर हेलिकॉप्टर से 25 क्विंटल फूल बरसाए गए। 13 जनवरी से अब तक 48.19 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। अब 26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर आखिरी स्नान पर्व होगा। —————— ये खबरें भी पढ़िए कुंभ का इकलौता आश्रम, जहां सभी 9 महामंडलेश्वर विदेशी: हिंदी नहीं आती, पर संस्कृत के श्लोक याद प्रयागराज महाकुंभ के सेक्टर-17 में निर्मोही अनी अखाड़े से जुड़ीं साईं मां का आश्रम। यह आश्रम शक्ति धाम नाम से जाना जाता है। इसमें 40 से ज्यादा देशों के भक्त हैं। यहां नौ महामंडलेश्वर हैं, सभी विदेशी हैं। एक को छोड़कर बाकी हिंदी नहीं जानते, लेकिन संस्कृत के श्लोक सभी को बखूबी याद हैं। इनमें कोई अमेरिका में डॉक्टर रहा, तो कोई जापान में टीचर। ये सभी अपने-अपने देशों में ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए सनातन धर्म का प्रचार कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर… महाकुंभ पहुंचे 77 देशों के डेलिगेट्स, राजदूतों ने खुद को बताया सौभाग्यशाली महाकुंभ में 1 फरवरी को 77 देशों के 118 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दिव्य-भव्य महाकुंभ को देख अभिभूत हो उठा। इन अतिथियों ने कहा- महाकुंभ भारतीय संस्कृति और धरोहर को दिखाता है। प्रयागराज पहुंचकर इन लोगों ने खुद को सौभाग्यशाली बताया। इन अतिथियों ने योगी सरकार व विदेश मंत्रालय द्वारा राजनयिकों के लिए इस यात्रा की व्यवस्था पर खुशी भी जताई। वहीं प्रयागराज पहुंचने पर अतिथियों का स्वागत किया गया। इन लोगों ने संगम में स्नान किया। संतों का आशीर्वाद भी लिया। पढ़ें पूरी खबर…


