जयपुर जिले में 142 स्कूल भवन जर्जर हालात में हैं। इनमें से 32 भवनों को जर्जर घोषित किया जा चुका है, जबकि शेष को भी जल्द जर्जर घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है। इन जर्जर स्कूल भवनों में कुल 30,170 कक्षा कक्ष हैं, जिनमें से 5,232 कक्ष ऐसे हैं, जो बच्चों के बैठने के लायक नहीं है। झालावाड़ में हुए हादसे के बाद शिक्षा विभाग ने जिला कलेक्टरों के माध्यम से प्रदेशभर में स्कूल भवनों का तकनीकी सर्वे कराया था। सर्वे में प्रदेश के 65,308 स्कूलों की स्थिति जांची गई, जिसमें 3,768 स्कूल भवन जर्जर मिले हैं। इनमें से 2,558 को जर्जर घोषित किया जा चुका है, जबकि 1,210 भवनों को जल्द जर्जर घोषित किया जाएगा। प्रदेश में जर्जर चिन्हित स्कूल भवनों में कुल 5,40,126 कक्षा कक्ष हैं। इनमें से 83,783 कक्षा कक्ष पूरी तरह जर्जर हैं, जहां बच्चों का बैठना भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता। इतनी बड़ी संख्या में कक्ष खस्ताहाल होने से प्रदेश में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले दिनों जर्जर स्कूल भवनों के मामले में हाईकोर्ट ने भी सख्त टिप्पणी करते हुए शिक्षा विभाग से स्थिति सुधारने के निर्देश दिए थे। नए भवन बनने की रफ्तार धीमी
प्रदेश में जर्जर घोषित किए गए 3,768 स्कूल भवनों के मुकाबले शिक्षा विभाग ने अभी तक केवल 123 स्कूलों के नए भवन बनाने की स्वीकृति जारी की है। वहीं 2,248 स्कूलों के लिए नए भवनों के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। जिस गति से निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है, उससे साफ है कि बच्चों को सुरक्षित भवन मिलने में अभी कई साल लग सकते हैं। जरूरी हुआ तो जमींदोज करेंगे
“भविष्य में बनने वाले नए स्कूल भवनों के निर्माण कार्यों में उनकी निर्माण तिथि, मरम्मत तिथि एवं अंतिम उपयोग तिथि भी निर्धारित की जाएगी। सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यकता पड़ने पर समय रहते ही उन्हें जमींदोज किया जा सकेगा। वर्तमान में 30 लाख रुपए से कम लागत वाले भवनों की थर्ड पार्टी ऑडिट नहीं हो पाती। अब आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक कॉलेजों के माध्यम से विद्यालय भवनों की थर्ड पार्टी ऑडिट कराई जाएगी, ताकि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच सुनिश्चित हो सके।”
-मदन दिलावर, शिक्षामंत्री


