उज्जैन में 11 से 16 फरवरी तक प्रदेश स्तरीय महाकाल वन मेले का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों, जड़ी-बूटियों और वन उत्पादों को एक मंच पर लाना है। यह मेला दशहरा मैदान पर आयोजित होगा, जिसकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। डोम और पवेलियन लगाए जा रहे हैं। यह वन मेला प्रदेश में उपलब्ध जड़ी-बूटियों, आयुष आधारित उपचार पद्धतियों और पारंपरिक औषधीय ज्ञान को आमजन तक पहुंचाने के लिए आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले भोपाल में कई वर्षों तक इस तरह के मेले का आयोजन होता रहा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर अब उज्जैन जैसे धार्मिक और पौराणिक नगर में इसका आयोजन किया जा रहा है। 200 से अधिक स्टॉल्स लगेंगे मेले में पूरे प्रदेश और देश से उत्पाद आएंगे। इसमें प्रदेश भर के वन धन केंद्र, स्वयं सहायता समूह और निजी स्टॉल्स शामिल होंगे। यहां आयुर्वेदिक, हर्बल उत्पाद, मिलेट्स आधारित खाद्य सामग्री, पारंपरिक खान-पान से जुड़े उत्पाद और वन उपज से बने सामान प्रदर्शित किए जाएंगे। असम सहित अन्य राज्यों की औषधीय वनस्पतियां भी मेले का हिस्सा होंगी। महाकाल वन मेले में 200 से अधिक स्टॉल्स लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, 50 से अधिक आयुर्वेदिक चिकित्सक निशुल्क चिकित्सा परामर्श शिविर के माध्यम से लोगों को आयुर्वेद से जुड़े रोगों की जानकारी और उपचार प्रदान करेंगे। खास फूड जोन भी तैयार होगा मेले में एक विशेष फूड जोन भी तैयार किया जाएगा, जहां प्रदेश के विभिन्न अंचलों के पारंपरिक व्यंजन उपलब्ध होंगे। साथ ही, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए औषधीय पौधों, उनके गुणों और उपयोग की जानकारी भी दी जाएगी। उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि यह प्रदेश स्तरीय महाकाल वन मेला केवल उत्पादों के प्रदर्शन का मंच नहीं होगा, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराएगा। वन उपज आधारित उत्पादों के माध्यम से लोगों को नए अवसर मिलेंगे।


