बुढ़ापे में भक्ति करने का इंतजार न करें, आग लगने पर कुआं खोदने का लाभ नहीं : प्रभाकर

भास्कर न्यूज | जालंधर आर्य समाज मंदिर, मॉडल टाउन में साप्ताहिक सत्संग के अंतर्गत यज्ञ का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया गया। यज्ञ का विधिवत संचालन पंडित सत्य प्रकाश शास्त्री एवं पंडित बुद्धदेव वेदालंकार द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य यजमान के रूप में वीरेंद्र कंवर, प्रेम कंवर, मनोज कपूर, नीरू कपूर एवं अरुणा चड्ढा ने यजमान पद पर आसीन होकर आहुतियां समर्पित कीं। यज्ञ उपरांत पंडित बुद्धदेव वेदालंकार ने महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन पर आधारित भजन सुना कर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। आचार्य अंकित प्रभाकर ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में अच्छाइयां और बुराइयां दोनों विद्यमान हैं, परंतु सुखी रहने के मार्ग प्रत्येक व्यक्ति के अपने कर्मों पर निर्भर करते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बचपन में व्यक्ति को दुख का अनुभव नहीं होता, किंतु जैसे-जैसे वह बड़ा होता है, जीवन की वास्तविकताओं से उसका सामना होता है। आचार्य प्रभाकर ने कहा कि हम सभी ईश्वर के आस्तिक भक्त हैं, इसलिए आत्मा और अंतःकरण से परमात्मा की भक्ति करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य प्रायः ईश्वर को केवल आवश्यकता के समय स्मरण करता है, जबकि परमात्मा निरंतर हम पर सुखों की वर्षा करता रहता है। इसलिए स्वस्थ शरीर में ही भक्ति करनी चाहिए, न कि केवल बुढ़ापे का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आग लगने पर कुआं खोदने का कोई लाभ नहीं, समय रहते तैयारी आवश्यक है। कार्यक्रम का मंच संचालन कोषाध्यक्ष जोगिंदर भंडारी ने प्रधान अरविंद घई के मार्गदर्शन में किया। इस अवसर पर डॉ. ऋषि कुमार आर्य, मोहन चावला, बलदेव मेहता, इंद्रजीत आर्य, कुलभूषण धीर, हिंद पाल सेठी, राजेश आर्य, शशि मेहता, सुदेश भंडारी, कमलेश सेठी, रजनी सेठी, लता राय एवं नंदिता आर्य सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। शांति पाठ के पश्चात प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। हमारी प्रार्थनाएं ही हमारे कर्म : आचार्य ने वेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर हम सबका पिता है, अतः स्वयं को पूर्ण रूप से उसी को समर्पित कर देना चाहिए। वेद कहते हैं- योग्य बनो, सब कुछ मिलेगा। पुण्य कर्मों के द्वारा पुण्य का खाता सशक्त बनाइए, तभी परमात्मा कृपा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि हमारी प्रार्थनाएं ही हमारे कर्म हैं और समर्पण भाव से किया गया प्रत्येक कार्य सफल होता है।

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