भास्कर न्यूज | जालंधर ‘ईजी रजिस्ट्रेशन’ के सर्वर में तकनीकी खामियां लगातार सामने आ रही हैं। सोमवार को भी जालंधर सब-रजिस्ट्रार-1 और 2 के पास 20 के करीब मामले बोगस पहुंचे, जिसमें एक ही गलत डॉक्यूमेंट को बार-बार नई आईडी जेनरेट करके अपलोड किया जा रहा था। इस कारण जालंधर का रिजेक्शन रेट भी बढ़ा। हालांकि यह डॉक्यूमेंट किस आईडी से अपलोड हो रहे हैं? इसे लेकर अधिकारी भी परेशान है। अधिकारियों के पास इसे चेक करने के लिए लोकल स्तर पर कोई एक्सेस नहीं हैं। पिछले कई महीनों से यह रूटीन में चल रहा है कि गलत प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाने के लिए गलत डॉक्यूमेंट अपलोड किए जा रहे हैं। हालांकि सरकार का दावा था कि ईजी रजिस्ट्रेशन से पुराना नेक्सस और प्राइवेट करिंदों का जुगाड़ खत्म किया जाएगा। लेकिन इसका भी ‘जुगाड़’ लोगों ने निकाल लिया है। हालांकि पिछले महीनों भी दो गलत डॉक्यूमेंट अपलोड करने वाली आईडी को ब्लॉक किया गया था, लेकिन बावजूद इसके गलत डॉक्यूमेंट को अपलोड करने का काम जारी है। जालंधर का रिजेक्शन रेट लगातार 15 फीसदी के पास रह रहा है क्योंकि सोमवार को जालंधर-2 में ही एक एसआर की आईडी में 10 से ज्यादा गलत डॉक्यूमेंट अपलोड हुए है। यह है प्रक्रिया… दरअसल डॉक्यूमेंट कोई भी पब्लिक, डीड राइटर, वकील कर सकता है, ऐसे में डीड अपलोड करने के लिए कोई भी फीस नहीं है और जब डॉक्यूमेंट अपलोड होने के बाद उसे एसआर ओके करता है तभी उसके बाद सरकारी फीस जमा करवाई जाती है। जिसके चलते लोग लगातार गलत डॉक्यूमेंट अपलोड कर रहे है क्योंकि कोई फीस नहीं है। इस लिए सरकार अपलोड करने से पहले सरकारी फीस जमा करवाए ताकि गलत डॉक्यूमेंट अपलोड करने वालों पर रोक लगाई जा सके। यह है हल… रेवेन्यू विभाग की तरफ से जालंधर के अधिकारियों को भी एक्सेस दिया जाए कि किस तरह से लोग अपलोड कर रहे है उनकी आईडी को पहचान की जा सके। ताकि बोगस डॉक्यूमेंट अपलोड करने पर रोक लगाई जा सके। इसके अलावा जिन आईडी से लगातार गलत डॉक्यूमेंट अपलोड हो रहे है उनके खिलाफ कार्रवाई की जरूरत है।


