प्रदेश में श्रद्धा का तरीका बदल रहा है। मंदिर वही हैं, आस्था भी वही है, लेकिन भक्ति अब डिजिटल हो चुकी है। देवस्थान विभाग मंदिरों में ऑनलाइन दान की सुविधा को लगातार विस्तार दे रहा है। नतीजे भी साफ नजर आने लगे हैं। नकद और दान पेटियों के मुकाबले ऑनलाइन दान न सिर्फ आगे निकल चुका है, बल्कि नया ट्रेंड बनता जा रहा है। विभाग ने साल 2019 में ऑनलाइन दान की शुरुआत उदयपुर जिले के ऋषभदेव (केसरियाजी) और गोगाजी (गोगामेड़ी) मंदिर से की थी। अब इस व्यवस्था को और व्यापक बनाते हुए 24 प्रमुख मंदिर व 18 देवी मंदिरों को भी ऑनलाइन दान प्रणाली से जोड़ा गया है। ये है वजह : पारदर्शिता और तत्काल रसीद, इसलिए बढ़ा भरोसा विभाग के अनुसार 2019 से अब तक 32.50 लाख का दान मिला है। इसमें से 27.48 लाख ऑनलाइन आए हैं। आंकड़ा बता रहा है कि श्रद्धालु अब मोबाइल और यूपीआई के जरिए दान देना ज्यादा आसान मानने लगे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस वर्ष अब तक 65 हजार का दान पूरी तरह ऑनलाइन रहा है। ये भेंट सालासर हनुमानजी, खाटूश्यामजी, सांवलियाजी, रामदेवरा, ब्रजनिधि, पद्मनाथ सूर्य, गायत्री मंदिर आदि को मिली है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पारदर्शिता, सुविधा और तत्काल रसीद जैसी वजहों से ऑनलाइन दान पर भरोसा बढ़ा है। अधिकारियों के अनुसार यह दान राशि किसी ट्रस्ट को न देकर इसका उपयोग सीधे राजकीय स्तर पर मंदिरों और तीर्थ स्थलों की जनसुविधाओं के विकास पर किया जा रहा है। यानी श्रद्धालुओं का दान उनकी सुविधा पर ही खर्च हो रहा है।


