भास्कर न्यूज | अलवर पति मध्यमवर्गीय परिवार से है जो जरूरत के मुताबिक वस्तुओं से काम चलाता है। पत्नी ऊंचे खानदान से और उसे सफाई पसंद है। दोनों के बीच विवाद का कारण बनते हैं तौलिए। क्योंकि पति एक ही तौलिये के उपयोग का आदी रहा है। सफाई पसंद पत्नी हर काम में लिए अलग तौलिया रखती है। इस बात को लेकर उसका पति से बार-बार विवाद होता है। यह विवाद ही दर्शकों के बीच रोमांच व हास्य रस घोलता रहा। रंग संस्कार थियेटर ग्रुप की ओर से अलवर रंगम नाट्य उत्सव के तहत महावर ऑडिटोरियम में हुए नाटक “तौलिए” के मंचन ने लोगों को खासा गुदगुदाया। नाटक के अंत में एक रंग संवाद का आयोजन किया गया। जिसमें दर्शकों ने नाटक के विषय और प्रस्तुति पर अपने विचार साझा किए। नाटय दल गाजियाबाद से आया था। नाटक “तौलिए” उपेंद्रनाथ अश्क द्वारा लिखित एकांकी नाटक का निर्देशन टेकचंद ने किया। यह नाटक एक मध्यम वर्गीय परिवार के जीवन पर केंद्रित है। नाटक में मधु और बसंत के बीच तौलिए को लेकर हुए विवाद को बेहद सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसका केंद्रबिंदु तौलिए को लेकर हुआ विवाद है, जो आज भी हमारे समाज में प्रासंगिक है। अलवर रंगम 2024-25 के तहत आयोजित इस नाटक ने दर्शकों को न केवल मनोरंजन दिया, बल्कि उन्हें सोचने पर भी मजबूर किया।


