प्रदेश में फर्जी डिग्री और फर्जी खेल प्रमाण पत्र ही नहीं फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी धड़ल्ले से बन रहे हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की 5 भर्तियों में ही 336 अभ्यर्थियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी मिले हैं। इन भर्तियों में दिव्यांग कोटे में दोगुना में चयनित करीब 4518 को दस्तावेज सत्यापन (डीवी) के लिए बुलाया था। इस दौरान मेडिकल जांच की गई तो अलग-अलग जिलों के जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) द्वारा जारी 336 दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी निकले। दरअसल, यह पूरा खेल सरकारी भर्तियों में 4% दिव्यांग कोटे में नौकरी पाने के लिए चल रहा है। इससे पूरी तरह स्वस्थ लोग फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर असल दिव्यांगों का हक मार रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद बोर्ड ने चिकित्सा विभाग के प्रमुख सचिव को इन सीएमएचओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। बोर्ड ने पत्र में लिखा है कि जब सीएमएचओ से फर्जी प्रमाण पत्रों के बारे में पूछा तो अधिकांश ने जवाब नहीं दिया, जिन्होंने दिया, वह भी संतोषप्रद नहीं था। इससे साबित होता है कि मिलीभगत से फर्जीवाड़ा हो रहा है। परिस्थितियों को देखते हुए जिन-जिन सीएमएचओ द्वारा गलत प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए ताकि गलत प्रमाण पत्र जारी करने वाले व जारी करवाने वाले को सख्त संदेश जाए। बोर्ड ने सत्यापन के दौरान मेडिकल कराया तो खुला फर्जीवाड़ा बोर्ड ने अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन के दौरान मेडिकल करवाया तो इस फर्जीवाड़े की पोल खुल गई। कई ऐसे अपात्र अभ्यर्थियों को भी दिव्यांग श्रेणी में चयन करने के लिए 40 प्रतिशत से अधिक का दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करना सामने आया जिनको 40 प्रतिशत से कम या शून्य दिव्यांगना थी। हैरानी…कई प्रमाण पत्र 40% से कम या शून्य दिव्यांगता वाले चयन बोर्ड के सचिव डॉ. भागचंद बधाल का कहना है कि 5 भर्तियों में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में दिव्यांग कोटे में चयनित होने वालों का फिर से मेडिकल कराया गया तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। कई जिलों के सीएमएचओ ने ऐसे लोगों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी कर दिया, जिनको 40% से कम या शून्य दिव्यांगता थी। हमने चिकित्सा विभाग को ऐसे सीएमएचओ के खिलाफ विभागीय स्तर पर सख्त कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा है। 10 साल में दिव्यांग कोटे से नौकरी पाने वालों की जांच हो: महासंघ दिव्यांग अधिकार महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हेमंत भाई गोयल का कहना है कि जिन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए। सरकार को पिछले 10 सालों में हुई भर्तियों में दिव्यांग कोटे के चयनितों की फिर से मेडिकल बोर्ड से जांच करवाना चाहिए ताकि योग्य दिव्यांगों को हक मिल सके। करीब तीन साल से ही दिव्यांग कोटे से चयनितों की फिर से मेडिकल बोर्ड से जांच कराई जा रही है। इससे पहले नहीं होती थी।


