बुंदेलखंड के 5 जिलों में 28 मिट्टी परीक्षण लैब ऐसी है, जो 6 साल से बंद पड़ी है। बावजूद इसके इन मिनी लैब में 87.21 लाख रुपए का केमिकल भेज दिया। ये केमिकल 4 महीने से ऐसा ही पड़ा है, जो अप्रैल 2025 में एक्यपायर हो जाएगा। तकनीशियन नहीं होने से इन लैबों के अभी चालू होने की उम्मीद भी नहीं है। केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत साल 2017-18 में मध्यप्रदेश के प्रत्येक ब्लॉक में मृदा परीक्षण केंद्र खोलने के लिए राशि जारी की। इसके तहत बुंदेलखंड के 5 जिलों में 28 केंद्रों का निर्माण हुआ। एक मिनी लैब का भवन 36 लाख रुपए में तैयार हुआ। इस तरह 10.08 करोड़ रुपए खर्च किए। फिर इन सभी केंद्रों में कम्प्यूटर और लैब उपकरण स्थापित किए। इस पर 22 लाख रुपए प्रति मिनी लैब खर्च किए। इसका कुल खर्च 6.16 करोड़ आया। इस प्रकार बुंदेलखंड की 28 लैब पर 16.24 करोड़ रुपए खर्च किए। अब इन लैबों में स्टॉफ पदस्थ करना था लेकिन प्रदेश सरकार ने ये काम नहीं किया। नतीजतन इनमें से एक भी लैब चालू नहीं हो पाई। अब कृषि विभाग ने इन सभी लैब के लिए केमिकल भेज दिया है, जो अनुपयोगी हो रहा है। सागर : रहली की मिट्टी परीक्षण लैब का भवन ही जर्जर हो गया ये है सागर जिले के रहली में स्थित मिनी लैब भवन। छह साल में लैब का भवन ही जर्जर हो गया। पानी के पाइप टूट गए हैं। खिड़कियों के कांच भी तोड़ दिए हैं। भवन का चैनल खुला पड़ा है। इसके लिए आई मशीनें भी धूल खा रही है। दमोह : शिलालेख टूट गए लेकिन इस प्रयोगशाला का ताला नहीं खुला दमोह जिले के बटियागढ़ की इस मिनी लैब का शिलालेख ही टूट गया लेकिन ताला नहीं खुला। यहां भी लैब के लिए 22 लाख रुपए की लागत से आए कम्प्यूटर और उपकरण स्टोर रूम में धूल खा रहे हैं। स्टॉफ अब तक पदस्थ नहीं किया। छतरपुर में 52 लाख रु. का केमिकल आया सीधी बात – एंदल सिंह कंसाना, कृषि मंत्री, मप्र शासन मामले की जांच करेंगे Q. सागर संभाग की बंद मिनी लैबों के लिए कैमिकल भेजा है, क्यों?
– लैब बंद है तो केमिकल भेजना ही नहीं चाहिए। यह गलत है। इसकी जांच करवाएंगे कि ऐसा क्यों किया। इसके लिए कौन अफसर जिम्मेदार है?
Q. पूरे प्रदेश की मिनी लैब 6 साल से बंद है, ये कब चालू होगी?
– मिट्टी परीक्षण लैब स्टॉफ की कमी की वजह से बंद है। इनमें स्टॉफ की भर्ती के लिए वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजा है।


