एजुकेशन रिपोर्टर | भिलाई शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में विदाई समारोह तथा अन्य अवसरों पर बच्चों द्वारा जोखिम भरे कृत्यों पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गंभीर चिंता जताई है। बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम-2005 की धारा-13 तथा सहपठित धारा-15 के तहत बच्चों के जीवन के अधिकार की रक्षा को सर्वोपरि मानते हुए आयोग ने सख्त अनुशंसाएं जारी की हैं। आयोग ने निर्देश दिया है कि यदि विद्यालयों में विदाई समारोह या अन्य आयोजन बच्चे करते हैं तो इसकी पहले से सूचना शाला को हो और स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया जाए। समारोह गारिमामय ढंग से शिक्षकों की निगरानी में हो। यह तय किया जाए कि किसी भी प्रकार के जोखिम भरे स्टंट या लापरवाह गतिविधि को स्थान न मिले। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि विद्यालय परिसर से बाहर होने वाले आयोजनों पर भी शाला प्रबंधन की नैतिक जिम्मेदारी होगी। वह बच्चों को ऐसे कृत्यों से दूर रखें। यदि कोई घटना प्रकाश में आती है, तो संबंधित शाला प्रमुख को तत्काल नोटिस जारी कर कारण पूछा जाए और आवश्यक चेतावनी दी जाए। साथ ही आयोग ने अनुशंसा की है कि ऐसी घटनाओं की स्थिति में संबंधित पुलिस अधिकारी विद्यालयों में जाकर बच्चों को गंभीरता और स्नेह पूर्वक समझाइश दें, ताकि दंड के भय से अधिक जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो। आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने कहा है कि आयोग के संज्ञान में ऐसे दृश्य आए हैं, जिनमें विद्यार्थी चलती कारों की खिड़कियों से बाहर निकलकर झूमते नजर आए, दुपहिया वाहनों पर स्टंट करते दिखे या तेज रफ्तार में वाहन दौड़ाते पाए गए। आयोग का स्पष्ट कहना है रोमांच अपनी जगह है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा उससे कहीं ऊपर है। किशोरावस्था में साहसिक और रोमांचक गतिविधियों के प्रति आकर्षण स्वाभाविक है, लेकिन यह आकर्षण यदि लापरवाही में बदल जाए तो अनमोल जीवन खतरे में पड़ सकता है।


