100 गज की फैक्ट्री में सुरक्षा इंतजाम नहीं थे, 90% शटर बंद रहता था

^घटना के बारे में जानकारी मिली है। पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जुवेनाइल एक्ट के तहत बाल श्रम नहीं कराया जा सकता है। इस मामले में बनती कार्रवाई की जाएगी। -रश्मि, बाल संरक्षण अधिकारी ^हमें घटना के बारे में जानकारी नहीं है। लगातार रेड्स करते हैं जिसमें पिछले एक साल में करीब 200बच्चों का रेस्क्यू किया गया है।-संदीप सिंह, सदस्य, बचपन बचाओ आंदोलन शंकर गुर्जर|लुधियाना धूरी रेलवे लाइन के पास मोहल्ला सेवकपुरा कलसियां वाली गली में साइकिल की सीट बनाने वाली इंडस्ट्री में आग लगने से दो नाबालिगों की मौत में कई सवाल उठे हैं। फैक्ट्री में सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। करीब 100 गज में चल रही इंडस्ट्री में फायर एस्टिंगविशर नहीं लगाए गए थे और ना ही एग्जॉस्ट फैन लगाए गए थे। शटर को अक्सर 90 फीसदी बंद रखा जाता था। आरोप है कि फैक्ट्री मालिक की लापरवाही के कारण ये हादसा बड़ा हो गया। चंद मिनटों में ही फोम ने आग पकड़ ली और धुआं बढ़ता चला गया। शटर पूरी तरह खुला नहीं होने के कारण धुआं अंदर ही रहा जिससे नियाज और समद का दम घुट गया। ये भी बात सामने आई कि इस इंडस्ट्रीज में सामान तैयार करने के लिए ठेकेदार सोनू सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आरोप है कि ठेकेदार से जब पुलिस ने काम करने वाले मजदूरों के बारे में पूछा तो उन्होंने जानकारी होने से इनकार कर दिया। सिस्टम की सिस्टम की नाकामी के कारण ही फैक्ट्री में लगी आग से दो नाबालिगों की जान चली गई। प्रशासन, लेबर डिपार्टमेंट और बाल विकास विभाग की बाल श्रम रोकने की जिम्मेदारी है लेकिन ये अभियान सिर्फ खानापूर्ति के तौर पर चल रहे हैं। इस घटना से ये साबित हो गया है कि अफसरों की मीटिंग, छापेमारी सिर्फ दिखावे के नाम पर हो रही है। मोहल्ला सेवकपुरा कलसियां वाली गली में साइकिल की सीट बनाने वाली इंडस्ट्री में आग लगने से दो नाबालिगों की मौत हो गई जबकि दो गंभीर रूप से झुलस गए। इस घटना के बाद प्रशासन, लेबर डिपार्टमेंट और बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। शहर में होजरी समेत अन्य इंडस्ट्रीज में नाबालिग काम कर रहे हैं जिन्हें रेस्कयू कराने में प्रशासन समेत अन्य अफसर फेल रहे हैं। यह हाल तब है जब हाईकोर्ट ने बाल श्रम रोकने को जिला स्तर पर कमेटी बनाकर एक्शन लेने के आदेश दिए हैं। बकायदा, एनजीओ को भी कमेटी में शामिल किया गया है लेकिन अफसर व एनजीओ सिर्फ खानापूर्ति करते नजर आ रहे हैं। अगर जिम्मेदार एक्शन लेते तो दो बच्चों की जान नहीं जाती। ^छोटे स्थान में इंडस्ट्री चल रही थी जहां सेफ्टी मेजर्स नहीं थे। शटर को 90 फीसदी तक बंद रखा जाता था। यह घोर लापरवाही दर्शाता है। फैक्ट्री मालिक की लापरवाही से यह हादसा हुआ है। पुलिस दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे। मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। सरकार और प्रशासन से मांग है कि मृतक के परिवारों और घायलों को मुआवजा दिया जाए। फैक्ट्री वाले नाबालिगों से काम नहीं कराएं और गाइडलाइंस का पालन करें। -मो. मुस्तकीम, समाजसेवी ^बाल श्रम रोकने की जिम्मेदारी डिप्टी कमिश्नर, लेबर डिपार्टमेंट, बाल संरक्षण अधिकारी की है। लेकिन जरूरत के हिसाब से बाल श्रम रोकने को काम नहीं हो रहा है। लुधियाना में होजरी, साइकिल इंडस्ट्री में नाबालिग काम कर रहे हैं। दो एनजीओ को ही सदस्य बनाया जाता है जबकि इनकी संख्या बढ़नी चाहिए। बाल श्रम उन्मूलन सप्ताह सिर्फ जून और नवंबर में मनाया जाता है जबकि अन्य दिनों में ही अभियान चलने चाहिए। -एडवोकेट दिनेश शर्मा, संस्थापक, पावर ऑफ लीगल एंड नेशनल इंपावरमेंट

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