झारखंड में अब खनिज और माइनिंग क्षेत्र में टैक्स डिफॉल्टर और अवधि समाप्त हो चुकी पुरानी गाड़ियां नहीं चल सकेंगी। डिफाल्टर गाड़ियों के चलने पर बैन लगेगा। खान और परिवहन विभाग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। जल्द ही खान विभाग खनन के क्षेत्र में चल रही ऐसी गाड़ियों को ढुलाई चालान जारी नहीं करेगा। खान विभाग चालान देने से पहले जिम्स पोर्टल में एक फिल्टर लगाएगा। इसमें परिवहन के लिए आए वाहनों के नंबर की जांच होगी। पता लगाया जाएगा कि वाहन का परिवहन टैक्स अपडेट है या नहीं। गाड़ी की समय सीमा समाप्त हो चुकी है या नहीं। यदि दोनों रिपोर्ट पॉजिटिव हुए, तभी ही गाड़ी को माइनिंग चालान मिलेगा। खान विभाग ने परिवहन विभाग से ढुलाई में लगे वाहनों की पूरी सूची मांगी है। इधर, परिवहन विभाग सभी डीटीओ को माइनिंग में चल रही गाड़ियों की जांच करने का निर्देश देने वाला है। इसमें डीटीओ को माइनिंग क्षेत्र और खनिज की ढुलाई में लगी गाड़ियों की जगह-जगह जांच करना होगा। यह देखना होगा कि वाहन टैक्स डिफाल्टर या अवधि पुरानी हो चुकी की श्रेणी में तो नहीं है। अगर गड़बड़ी मिली, तो वाहन को जब्त कर लिया जाएगा। कार्रवाई भी होगी। राज्य में चल रही हैं तीन लाख टैक्स डिफॉल्टर और पुरानी गाड़ियां ऐसे वाहनों पर 300 करोड़ टैक्स बकाया राज्य भर में करीब 3 लाख टैक्स डिफाल्टर और पुरानी हो चुकी गाड़ियां चल रही हैं। इन पर करीब 300 करोड़ रुपए का बकाया है। इस योजना का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना भी है। जहां से राजस्व कम आ रहा है, वहां से राजस्व वसूली के उपाय ढूंढ़े जा रहे हैं। इसके लिए वित्त विभाग के विशेष सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी हुई है। इसके अलावा प्रदूषण रोकने के लिए भी अवधि समाप्त गाड़ियों को हटाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। जानिए…क्या है टैक्स डिफॉल्टर गाड़ियां जो वाहन परिवहन टैक्स तय सीमा के 90 दिनों के बाद भी जमा नहीं करती है, तो उस पर 200 प्रतिशत पेनाल्टी लगाई जाती है। वह टैक्स डिफाल्टर की श्रेणी में आती है। गाड़ियों के चलने की समय सीमा (10) साल है। इसके बाद परिवहन विभाग से एक्सटेंशन की अनुमति लेनी पड़ती है। अनुमति नहीं मिलने या अवधि समाप्त होने वाली गाड़ियों का प्रचलन पूरी तरह से प्रतिबंधित है।


