सोलर प्लांट व अन्य विकास परियोजनाओं के लिए पेड़ों की हो रही अंधाधुंध कटाई के विरोध में बीकानेर जिले में करीब 220 दिन से धरना जारी है। पश्चिमी राजस्थान में पेड़ों में सबसे ज्यादा कटाई खेजड़ी की हो रही है। ऐसे में पर्यावरण प्रेमी राज्य सरकार से खेजड़ी कटाई के विरोध में सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। इसी कड़ी में अब तक पांच जिलों में बंद सफल रह चुका है। शुक्रवार को राज्य सरकार बजट पेश करेगी, उसमें खेजड़ी व ओरण संरक्षण की दिशा में किसी कानून या योजना की घोषणा पर आंदोलन कर रहे लोगों की नजर है। अगर कुछ कड़े कदम नहीं उठाए जाने पर राजस्थान बंद कराने पर विचार भी करेंगे। इसके लिए आगामी 25 फरवरी से 1 मार्च तक नोखा के मुकाम में प्रदेश के साथ अन्य राज्यों के पर्यावरण प्रेमी भी हिस्सा लेंगे। इसमें आगामी रणनीति बनाई जाएगी। अब तक 26 दिसंबर को बीकानेर, 19 जनवरी को जोधपुर, 29 जनवरी को सांचौर, 9 फरवरी को श्रीगंगानगर और 17 फरवरी को बाड़मेर जिला मुख्यालय बंद रखा गया। इसमें व्यापारी व अन्य सामाजिक संगठन भी समर्थन दे रहे हैं। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठा चुके हैं। रोड़ी में गत वर्ष जुलाई से दिन रात अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं लोग सबसे पहले बीकानेर जिले की कोलायत तहसील एरिया में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से आहत लोगों ने विरोध जताया। प्रदर्शन ज्ञापन के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पर्यावरणप्रेमी धरने पर बैठ गए। रोड़ी गांव में यह धरना गत वर्ष की 18 जुलाई से अनिश्चितकालीन जारी है। इस दौरान आंदोलन पर बैठे लोगों की मुख्यमंत्री भजनलाल से मुलाकात करवाई गई। उन्होंने आश्वसन दिया लेकिन अब तक कुछ ठोस कदम नहीं उठाए जाने से लोग धरना जारी रखे हुए हैं। उन्हें बजट प्रावधानों में किसी घोषणा का इंतजार है। पेड़ काटने पर कड़ी सजा का प्रावधान करने की मांग प्रमुख बंद-धरने को अब तक पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी, शिव विधायक रविंद्रसिंह भाटी समर्थन दे चुके हैं। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा, जंभेश्वर पर्यावरण संघर्ष समिति एवं सर्व समाज के लोग खेजड़ी और ओरण बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। एक पेड़ के बदले दस पेड़ लगाने के नियम की कहीं भी पालना नहीं हो रही है। उनका कहना है कि खेजड़ी काटने के बदले न्यूनतम जुर्माना 2 लाख रुपए प्रति खेजड़ी और 3 साल की सजा का प्रावधान हो।


