नीला झंडा गुरुद्वारा साहिब के पास नवजात बच्ची को 2.10 लाख रुपए में बेचने का मामला सामने आया है। मां और बीएएमएस डॉक्टर समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों को दंपती की गतिविधियों पर शक हुआ तो उन्होंने पूछताछ की। महिला ने बताया कि बच्ची को उसने 2.10 लाख रुपए में खरीदा है और उसे लेने के लिए मोगा से लोग लुधियाना पहुंचे हैं। लोगों ने दंपती को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। डिवीजन-3 थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की और बीएएमएस डॉक्टर समेत कुल 8 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। एडीसीपी-1 समीर वर्मा के अनुसार 14 फरवरी को बाबा थान सिंह चौक स्थित अरोड़ा नर्सिंग होम में सुनीता देवी ने बच्ची को जन्म दिया। वह शेरपुर कलां की शहीद भगत सिंह कॉलोनी में रहती है और मूल रूप से गोरखपुर (यूपी) की रहने वाली है। सुनीता की पहले से चार बेटियां हैं। पांचवीं बार भी बेटी होने पर पति नाराज था। अस्पताल की नर्स आशा और केयरटेकर रुचि के जरिए मोगा के गांव नंगल की मनदीप कौर से सौदा तय हुआ। मनदीप की शादी को 5-6 साल हो चुके हैं और उसकी कोई संतान नहीं है। पुलिस ने मां सुनीता देवी, नर्स परवीन, बीएएमएस डॉक्टर मनमीत कौर, मददगार रुचि और खरीदार मनदीप कौर को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि नर्स आशा, मददगार गुरमीत कौर और आशा वर्कर पम्मा फरार हैं। बिल के अलावा उन्होंने कोई पैसा नहीं लिया बच्ची के पिता केशव लाल निवासी शहीद भगत सिंह कॉलोनी ने भास्कर को बताया, सुनीता से उसकी दूसरी शादी है। पहली शादी से उन्हें एक बेटा है, जबकि सुनीता पहले ही चार बेटियों को जन्म दे चुकी है। जब पांचवीं बेटी हुई तो परेशान सुनीता ने उसे अस्पताल में ही छोड़कर भाग जाने की बात कही। क्योंकि वह बिल नहीं दे सकते थे। इसी दौरान मुझे नाराज देखकर उनकी बातचीत अस्पताल की एक नर्स ने सुनी तो उसने बच्ची को किसी अन्य को देने की सलाह दी। बदले में उन्होंने सिर्फ अस्पताल का बिल चुकाने की बात कही, जो करीब 25 हजार रुपये था। केशव ने स्पष्ट किया कि इसके अलावा उन्होंने किसी तरह के पैसे नहीं लिए। जो भी पैसे लिए या दिए जा रहे थे वह सब उन्हीं की योजना का हिस्सा था। मेरी दुकान के सामने हुई सौदेबाजी, शक हुआ तो महिलाओं को पकड़ा “आरोपी मेरी दुकान के सामने दोपहर तीन बजे से अपनी फॉरच्यूनर कार खड़ी करके बैठे थे। मैं बार-बार उन्हें देख रहा था कि कब वे गाड़ी हटाएंगे। मेरी नजर पास खड़ी दो महिलाओं पर पड़ी। मैंने देखा कि एक महिला बैग से रुपए निकालकर गुरुद्वारा साहिब के पास खड़ी दूसरी महिला को देने लगी, लेकिन उसने यह कहकर पैसे लेने से इनकार किया कि रुपए कम हैं। करीब 10 मिनट मोलभाव चलता रहा। सेटिंग होने पर दूसरी महिला ने इशारा करके पार्क में बैठे एक दंपति को वहां बुलाया। आदमी ने महिला से रुपए हाथ में लिए और उसके बाद बच्ची को दूसरी महिला के हवाले कर दिया। यह देखकर मुझे शक हुआ कि यहां बच्ची को बेचा जा रहा है। मैं तुरंत मौके पर पहुंचा और दोनों महिलाओं को पकड़ लिया। मैंने सख्ती से बच्ची के बारे में पूछा और शोर मचाकर आसपास के लोगों को भी बुला लिया। भीड़ जमा होती देख कार में बैठे लोग मौके से फरार हो गए। मैंने अपने एक जानकार को उनका पीछा करने के लिए कहा। दो युवकों ने बाइक पर सवार होकर मोहर सिंह नगर तक उनका पीछा किया और उन्हें पकड़कर वापस मौके पर ले आए। जब सभी से सख्ती से पूछताछ की गई तो उन्होंने बच्ची को बेचने की बात कबूल कर ली। फिर थाना डिवीजन-3 की पुलिस को सूचना देकर बुलाया।” – जैसा मददगार यतविंदर सिंह ने दैनिक भास्कर को बताया पिता केशव ने कहा- 7 किरदारों से समझें, कैसे चली सौदेबाजी की पूरी चेन थाना डिवीजन नंबर 3 की पुलिस की गिरफ्त में पकड़े गए सभी आरोपी। {सुनीता की पांचवीं बेटी से उसका पति खुश नहीं था। दंपती ने नवजात बच्ची को अस्पताल में छोड़ने का विचार किया तो वहां तैनात नर्स आशा ने उन्हें बच्ची को बेचने की सलाह दी। {आशा ने अपनी परिचित नर्स परवीन निवासी खुड्ड मोहल्ला से बात की। परवीन ने आगे नर्स गुरमीत कौर वासी मोगा से संपर्क किया। {गुरमीत कौर ने बच्चा खरीदने के लिए अमृतसर की आशा वर्कर पम्मा से बात की। {पम्मा के डॉक्टरों से अच्छे संपर्क होने के कारण उसने लुधियाना के पंजाब माता नगर में रहने वाली एक बीएएमएस डॉक्टर मनमीत कौर से बातचीत की। हालांकि, डॉक्टर के पास कोई ग्राहक नहीं मिला। {पम्मा ने मायके में रहने वाली रुचि से बात की। {रुचि, निवासी मोहल्ला संत कबीर नगर, ने मोगा के गांव नंगल की रहने वाली महिला मनदीप कौर से संपर्क किया। जिसे बच्चे की जरूरत थी। { मनदीप कौर से रुचि ने 2.10 लाख रुपए मांगे थे। डेढ़ लाख बच्ची की मां को देने की बात कही थी, जबकि 60 हजार रुपए रुचि खुद रखने वाली थी।


