भास्कर न्यूज | बाड़मेर माहे रमजान के पहले जुमा की नमाज के मौके पर गांधी चौक स्थित शाही जामा मस्जिद में हजारों की तादाद में रोजेदार और नमाजी जुटे। जामा मस्जिद में पेश इमाम हाजी मौलाना लाल मोहम्मद सिद्दीकी की इमामत में जुमा की नमाज अदा की। नमाज के बाद हजारों हाथ खुदा की बारगाह में दुआ के लिए उठे। नमाजियों ने मुल्क की खुशहाली, अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे और गरीबों व यतीमों की मदद के लिए खास दुआएं मांगी। इस अवसर पर पेश इमाम ने कहा कि इस्लाम हमें अपने देश से प्रेम, सामाजिक सद्भाव और इंसानियत की राह पर चलने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना हमें सब्र, संयम और परस्पर सहयोग का संदेश देता है, जिसे अपनाकर हम समाज में भाईचारे को मजबूत कर सकते हैं। मौलाना सिद्दीकी ने कहा कि सच्चा मोमीन वही है जो अपने किरदार व अमल से समाज और वतन का नाम रोशन करें। रमजान का महीना खुद की सुधार का बेहतरीन मौका है, जिसमें इंसान बुराइयों से दूर रहकर नेकियों की राह पर चलता है। आयशा मस्जिद में इमाम मौलाना खुर्शीद ने कहा कि यह महीना रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है। इस महीने में हर नेक अमल का सवाब 70 गुना तक बढ़ा दिया जाता है। रेलवे कुआं नंबर तीन स्थित मस्जिद ए अब्बास में मौलाना शेर मोहम्मद ने बताया कि रमजान को तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा रहमत का, दूसरा मगफिरत का और तीसरा जहन्नम से आजादी का होता है। हसन मस्जिद के इमाम मौलाना नूरदीन ने कहा कि दूसरा रोजा बंदे को धैर्य और दृढ़ता की राह पर मजबूती से कायम रहने का संदेश देता है। इंद्रा कॉलोनी स्थित मस्जिद ए इमाम हसन में मौलाना मेहराब सिकन्दरी ने कहा कि जुमा सामूहिक इबादत, आपसी भाईचारे और उम्मत की एकजुटता का प्रतीक होता है। फैजान मस्जिद के मौलाना जमाल अकबरी ने कहा कि यह दिन हमें याद दिलाता है कि रमजान केवल भूख-प्यास का नाम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, समाज सेवा और इंसानियत के रास्ते पर चलने का संदेश है। इस दौरान मुस्लिम इंतजामिया कमेटी के सदर हाजी गुलामनबी तेली, नायब सदर मुख्तियार नियारगर, सचिव अबरार मोहम्मद व खजांची मोहम्मद इलियास तेली ने मुबारकबाद पेश की।


