सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने राजस्थान के मुख्य सचिव को आनासागर झील के आसपास अवैध निर्माणों पर अपने आदेशों के अनुपालन के संबंध में एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा। न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान ने पिछले निर्देशों के बारे में जानकारी मांगते हुए कहा कि 1 जनवरी, 2024 को राज्य का हलफनामा दिया है वह उसके आदेशों के अनुरूप नहीं है। राज्य सरकार से पूछा कि 2021 से एनजीटी के कई आदेशों और 1 दिसंबर, 2023 के शीर्ष अदालत के आदेश के बावजूद वह कार्रवाई करने में विफल क्यों रही। अब मुख्य सचिव को विशेष विशिष्ट कदमों का विवरण देते हुए व्यक्तिगत हलफनामा दायर करना होगा। सीएस को 17 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में कोर्ट में पेश होना होगा। इस दौरान राज्य की योजना और सुधारात्मक उपायों के लिए समय सीमा की व्याख्या की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आदेश पर रोक नहीं लगाई है लेकिन अपीलकर्ताओं पर कोई दंडात्मक कार्यवाही भी नहीं की। सुप्रीम कोर्ट शुरू से ही सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं रहा। स्मार्ट सिटी की एसीईओ तथा नगर निगम कमिश्नर द्वारा पेश किए गए एफिडेविट पर भी सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए एक्सेप्ट नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप की कार्यप्रणाली से ऐसा नहीं लगता कि आप अजमेर को स्मार्ट बनाना चाहते हों। हमें आश्चर्य है कि शहर में जल निकायों, आर्द्रभूमि की सुरक्षा के बिना कोई शहर कैसे स्मार्ट बन सकता है और जल निकायों, आर्द्रभूमि पर अतिक्रमण करके शहर कैसे स्मार्ट बन सकते हैं। 8 अफसरों की कमेटी बनाई सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी को देखते हुए कलेक्टर ने 8 अधिकारियों की टीम गठित की है। एडीए के भूमि अवाप्ति अधिकारी खेमराम यादव, एसडीओ पदमा देवी, नगर निगम के मुख्य अभियंता नरेन्द्र अजमेरा, एडीए के निदेशक अभियांत्रिकी ओपी. वर्मा, निदेशक विधि नीता मिश्रा, निदेशक परियोजना महेन्द्र चौधरी, जल संसाधन विभाग के एसई केएम. जयसवाल, नगर निगम एक्सईएन रमेश चौधरी इसमें शामिल है। कमेटी तीन दिन रिपोर्ट देगी। गौरतलब है कि स्मार्ट सिटी के मुख्य अभियंता नरेन्द्र अजमेरा के कार्यकाल में सेवन वंडर, पाथ वे आदि बने। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पालन के लिए अवकाश के दिन कई कार्यालय खुले रहे। निर्माण वेटलैंड में नहीं: AAG सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि ये निर्माण अजमेर स्मार्ट सिटी परियोजना का हिस्सा हैं और अजमेर मास्टर प्लान का अनुपालन करते हैं। हम इस बात पर कायम हैं कि सेवन वंडर्स और अन्य संरचनाएं वेटलैंड क्षेत्र से बाहर थीं और झील के पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित नहीं करती थीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “जनवरी 2024 के हलफनामे में राजस्थान सरकार अनुपालन उपायों को पर्याप्त रूप से संबोधित करने में विफल रही। सुप्रीम कोर्ट अनुपालन में देरी से खफा था। निर्माण तुरंत हटवाएंः NGT एनजीटी की भोपाल बेंच ने अगस्त 2023 में एनजीटी ने सेवन वंडर्स पार्क, पटेल स्टेडियम, गांधी स्मृति उद्यान और झील के चारों ओर बने फूड कोर्ट को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। एनजीटी ने चिंता व्यक्त की थी कि निरंतर विकास से झील के पारिस्थितिक संतुलन को नुकसान पहुंच रहा है। स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में फोटो पेश करते हुए निर्माणों को सुंदर बताया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि निर्माण भले ही सुंदर हो लेकिन नियमों का उल्लंघन हुआ है तो तोड़ना पड़ेगा। सीजिंग का दांव काम नहीं आया आनासागर में वेटलैंड के किनारे चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने के लिए प्रशासन ने पिछले साल अक्टूबर में 35 निर्माणों को सीज कर दिया था ताकि सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा जा सके और पालना दिखाई जा सके। यह दांव काम नहीं आया। बचने की गलियां तलाश रहे सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद अफसर अब बचाव की गलियां ढूंढ रहे हैं। जानकारों की मानें तो अफसरों ने प्लान बनाया है कि सेवन वंडर और फूड कोर्ट के पास खाली जगह पर प्लांटेशन कर हरियाली दिखाई जाए। फूडकोर्ट सिरदर्द बन गया है, उसका कुछ हिस्सा तोड़कर कोर्ट में बता दें कि एनजीटी के आदेशों की पालना कर दी है। यहां ये बता दें कि नगर निगम एनजीटी में आनासागर को मानव निर्मित झील बता दावा कर चुका है कि इस पर वेटलैंड के नियम लागू ही नहीं होते। हालांकि निगम यह दलील काम नहीं आई। एडीए विधानसभा में जवाब दे चुका है कि वेटलैंड के लिए भूमि अवाप्त है। मुआवजा दिया जाना है।


