पानी का फ्लो बना रहे इसके लिए पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा। नहर की मरम्मत को लेकर जल संकट दस्तक दे रहा है। इसे रोकने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है। 4 साल के भीतर 11800 करोड़ खर्च कर इस मुसीबत से मुकाबला किया जाएगा। नहरबंदी के दाैरान तीन जिलों में 4.49 करोड़ रुपए खर्च कर टैंकरों से पानी घरों तक पहुंचाया जाएगा। नहर मरम्मत के बाद संग्रहित कर सकेंगे 15000 क्यूसेक तक पानी, जलाशय और टंकियां बनने के बाद टेल तक की समस्याओं का होगा समाधान। बीते चार साल से बीकानेर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में खेतों और आमजन की प्यास बुझाने के लिए करीब 11 हजार 860 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। शहरी इलाके
बीकानेर 14 काम 4.43 करोड़ 3.66 कराेड़
श्रीगंगानगर 4 काम 1.5 करोड 1.48 कराेड़
अनूपगढ़ 3 काम 95 लाख 67 लाख
हनुमानगढ़ 8 काम 1.79 करोड़ 2.14 कराेड़ ग्रामीण इलाके
बीकानेर 27 काम 10.69 करोड 11.61 कराेड़
श्रीगंगानगर 28 काम 3.79 करोड 3.4 कराेड़
अनूपगढ़ 6 काम 1.15 करोड 4.25 कराेड़
हनुमानगढ़ 6 काम 1.5 करोड़ 6.3 कराेड़ टैंकर से पानी सप्लाई पर भी 4.49 करोड़ खर्च होंगे बीकानेर शहर – 1.22 करोड़ से शहर में टैंकर से पेयजल की सप्लाई होगी। ग्रामीण क्षेत्र में इसी मद में 1.79 करोड़ खर्च होंगे जल जीवन मिशन की जिलेवार प्रगति को समझें
बीकानेर जिले में 854 गांव हैं। वृहद योजना में 486 गांव स्वीकृत हैं। ओटीएमपी में 350 गांव स्वीकृत हैं। 18 गांव नॉन फिजिबल हैं। ओटीपीएम में 345 गांव, 169 जलयोजना, 95671 जल संबंध काम हुए जिसमें 465 के कार्यादेश जारी हो चुके। अब तक 302 करोड़ का काम हो भी चुका है। जलजीवन मिशन की स्वीकृतियां
बीकानेर – 350 गांव में 556.21 करोड़
अमृत-2 के तहत टेंडर
बीकानेर – देशनोक और आसपास के लिए 358 करोड़ के टेंडर हुए हैं। पंजाब सीमा में नहर की मरम्मत पर खर्च : केंद्र सरकार और पंजाब सरकार के बीच हुए एमओयू के तहत 2018-19 में नहर की मरम्मत की जिम्मेदारी पंजाब सरकार को दी गई थी। इस पर करीब 3,291 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा राजस्थान सीमा में 3300 करोड़ रुपए अलग खर्च किए जा चुके हैं। कुछ काम शेष हैं जो इस साल होंगे। “2035 तक के प्राेजेक्ट का शहर में पहला चरण इस साल के अंत तक पूरा हाे जाएगा। नई टंकिया बनने, पाइप लाइन बिछने से टेल का संकट दूर हाे जाएगा।”
-राजेश राजपुराेहित, अतिरिक्त मुख्य अभियंता पीएचईडी इसमें 1200 करोड़ के जलाशय, 892 करोड़ की शहरी योजना शामिल नहीं
ऊपर जो भी बजट बताया उसमें आरडी 508, 750, 1294 समेत चार नए बड़े जलाशय के लिए तीन साल पहले केन्द्र सराकर की ओर से मिले 1200 करोड़ और बीकानेर शहर की 2050 तक की आबादी की प्यास बुझाने के लिए 892 करोड़ करुप के प्रोजेक्ट को जोड़ा नहीं है। अगर इसे भी शामिल करें तो ये 2000 करोड़ रुपए और हो जाएंगे। यानी करीब 13000 करोड़ रुपए होने के बाद आने वाले साल में टेल के लोगों को राहत मिलेगी। क्योंकि तब तक करीब 10 नई टंकियां बनकर तैयार होंगी। जलाशय बनने में अभी भी करीब एक साल और लगेगा। 2026 तक जब जलाशय बनकर तैयार होंगे तो उसमें बारिश के दौरान पानी भरकर रखा जाएगा जो गर्मियों में पीने के काम आएगा। पानी का फ्लो बना रहे इसके लिए पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा। नहर की मरम्मत को लेकर जल संकट दस्तक दे रहा है। इसे रोकने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है। 4 साल के भीतर 11800 करोड़ खर्च कर इस मुसीबत से मुकाबला किया जाएगा। नहरबंदी के दाैरान तीन जिलों में 4.49 करोड़ रुपए खर्च कर टैंकरों से पानी घरों तक पहुंचाया जाएगा। नहर मरम्मत के बाद संग्रहित कर सकेंगे 15000 क्यूसेक तक पानी, जलाशय और टंकियां बनने के बाद टेल तक की समस्याओं का होगा समाधान। बीते चार साल से बीकानेर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में खेतों और आमजन की प्यास बुझाने के लिए करीब 11 हजार 860 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।


