भास्कर न्यूज | सुकमा प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के अंतिम चरण का मतदान रविवार को होने के बाद अब नतीजे भी आने शुरू हो गए हैं। प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद सुकमा जिले के जिला पंचायत में भाजपा को ग्रामीण सत्ता मिलती नहीं दिख रही है। दरअसल जिले में जिला पंचायत सदस्य के 11 सीटें हैं, जिसमें कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों ने 5 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं 3 पर भाजपा समर्थित और 2 पर भाकपा समर्थित और 1 पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत हुई है। ऐसे में जिले में जिला पंचायत पर कांग्रेस का कब्जा होता दिख रहा है। दरअसल कांग्रेस को अपनी ग्रामीण सत्ता बनाने के लिए 6 सीटों की जरूरत है, जिसमें से 5 सीटें उन्हें पहले से मिल चुकी है। इन हालातों में भाकपा के साथ कांग्रेस के गठजोड़ की खबरें मिल रही हैं। जनपदों में भी भाजपा बहुमत तक नहीं पहुंच पा रही : नगर सरकार में भाजपा की जीत के बाद हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाजपा पिछड़ती दिख रही है। सुकमा जिले में ग्रामीण इलाकों में जनता ने भाजपा के खिलाफ जनादेश दिया है। सुकमा जिले के तीनों जनपदों में हुए जनपद सदस्य के चुनाव में भी भाजपा बहुमत से दूर है। सुकमा जनपद की 10 सीटों में से भाजपा को 4, कांग्रेस को 4 और सीपीआई के 2 समर्थित प्रत्याशी जीतकर आए। वहीं कोंटा जनपद की 19 सीटों में से भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को 8 सीटों पर जीत मिली, वहीं कांग्रेस को 4 और भाकपा ने 7 सीटों पर जीत हासिल की। इधर छिंदगढ़ में जनपद की 17 सीटों में से भाजपा समर्थित को 6, कांग्रेस समर्थित को 7 और भाकपा समर्थितों ने 4 सीटें जीती हैं। सुकमा जिले में सरकार के खिलाफ राजनीतिक दल गठबंधन करते आए हैं। कांग्रेस शासन काल में भाकपा ने भाजपा के साथ मिलकर सुकमा जनपद में अध्यक्ष के लिए समीकरण बनाया था। इस पंचायत चुनाव में भी भाकपा की स्थिति बेहतर है। जिला पंचायत और जनपद पंचायत की बॉडी बनाने भाकपा निर्णायक भूमिका में रहेगी।


