अस्पताल में काम करने वाली महिला स्वास्थ्य कर्मी दिन में तो बगैर किसी परेशानी और भय के काम करते हैं पर शाम होते ही उनमें अनजान भय होने लगता है। उनका कहना है कि दिन के समय में हमें किसी तरह का भय नहीं होता पर रात को डरे-सहमे रहते हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में लकड़ी के बने दो दर्जन से भी अधिक दरवाजे लगे हैं। वह भी जर्जर है। हल्का धक्का देने मात्र से ही वह गिर जाएगा। कई मर्तबा तो मरीज के साथ उनके परिजन भी शराब की नशे में पहुंच जाते हैं। चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर प्रतिमा कुमारी ने बताया कि वाहन चालक, रात्रि प्रहरी के अलावा 7 महिला और 5 पुरुष कर्मियों को मिलाकर कुल 12 कर्मी अस्पताल में कार्यरत हैं। सुरक्षा के लिहाज से अस्पताल में चहारदीवारी जरूरी है। चहारदीवारी नहीं होने से महिला कर्मी रात में अक्सर भयभीत रहते हैं। भास्कर न्यूज|डंडई प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को बने 14 वर्षों से भी अधिक समय बीत गया है। उसके बाद भी आजतक सुरक्षा की दृष्टिकोण से अस्पताल परिसर की चहारदीवारी नहीं हो सकी। उक्त वजह से अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक और कर्मी असुरक्षित महसूस करते हैं। चहारदीवारी को लेकर चिकित्सा पदाधिकारियों ने कई मर्तबा विभाग को पत्र भी लिखा पर उस ओर ध्यान नहीं दिया गया। अस्पताल में दिन हो या रात अक्सर मरीज और उनके परिजनों के अलावा अन्य लोगों का आना जाना लगा रहता है। चहारदीवारी का निर्माण नहीं होने से अस्पताल में कार्यरत महिला चिकित्सक व कर्मी भयभीत रहते हैं। चहारदीवारी नहीं होने से रात को रहने वाले महिला कर्मियों को अधिक परेशानी होती है। अस्पताल में फिलहाल चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर प्रतिमा कुमारी सहित सात महिला स्वास्थ्य कर्मी और पांच पुरुष कर्मी सहित करीब दर्जन भर कर्मी अस्पताल में कार्यरत हैं। प्रखंड के 90 हजार का चिकित्सा सेवा इसी अस्पताल पर निर्भर है।


