राजस्थान की 6,759 ग्राम पंचायतों के चुनाव स्थगित करने के मामले में सरकार ने हाईकोर्ट में जवाब पेश कर दिया हैं। सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि प्रदेश में ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की अवधारणा का परीक्षण प्रस्तावित है। परीक्षण के लिए उच्चस्तरीय समिति का भी गठन किया जाना है। समिति द्वारा धन, श्रम और समय की बचत के साथ ही नगरीय निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के सशक्तिकरण के लिए वन स्टेट वन इलेक्शन की अवधारणा का परीक्षण प्रस्तावित है। इसके साथ ही सरकार ने कहा कि पिछली सरकार ने कई नए जिले बना दिए थे। इनमें से हमने 9 जिलों को समाप्त कर दिया है। ऐसे में जिलों की सीमाओं के निर्धारण के साथ ही प्रदेश मे पंचायतों के पुर्नगठन और नगर निकायों के परिसीमन का काम चल रहा हैं। इसलिए सरकार ने इन पंचायतों के चुनाव स्थगित किए हैं। प्रशासक लगाना सरकार का अधिकार सरकार ने अपने जवाब में कहा कि जिन पंचायतों के चुनाव स्थगित किए गए हैं। उनमें सरकार को प्रशासक लगाने का अधिकार हैं।हमने राजस्थान पंचायत राज अधिनियम-1994 की धारा-95 के तहत प्रशासक लगाए हैं। एक्ट हमें प्रशासक लगाने का अधिकार देता है। लेकिन एक्ट में कहीं भी यह नहीं बताया गया है कि किसे प्रशासक लगाया जाए और किसे नहीं। सरकार ने नहीं बताया चुनाव कब तक कराएगी मामले में याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने कहा कि पिछली सुनवाई में अदालत ने सरकार से पूछा था कि वे इन पंचायतों के चुनाव कब तक कराएगी। लेकिन सरकार ने अपने जवाब में कहीं भी यह नहीं बताया। उन्होंने कहा कि सरकार प्राइवेट व्यक्ति को प्रशासक नहीं लगा सकती है। कार्यकाल खत्म होने के बाद सरपंच निर्वाचित नहीं रहे। इनकी जगह सरकारी अधिकारी को ही प्रशासक लगाया जा सकता है। वो भी केवल 6 महीने के लिए, लेकिन सरकार ने नोटिफिकेशन में यह साफ नहीं किया है कि कितने समय के लिए प्रशासक नियुक्त कर रही है। क्या था मामला
राजस्थान की 6759 ग्राम पंचायतों में जनवरी में चुनाव कराने की जगह सरकार ने मौजूदा सरपंचों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया था। सरपंचों की सहायता के लिए हर ग्राम पंचायत लेवल पर एक प्रशासकीय कमेटी भी बनेगी। इसमें उप सरपंच और वार्ड पंच मेंबर होंगे। पंचायती राज विभाग ने सरपंचों को प्रशासक नियुक्त करने और प्रशासनिक समिति बनाने का नोटिफिकेशन 16 जनवरी को जारी किया था। राजस्थान सरकार ने मध्य प्रदेश मॉडल पर यह फैसला किया है। पहले मध्य प्रदेश सहित कई भाजपा शासित राज्य भी इसी तरह सरपंचों को प्रशासक बना चुके हैं।


