जयपुर-अजमेर हाईवे और उससे जुड़ी सर्विस लेन पर बगरू तक चिह्नित 338 अतिक्रमण में से एनएचएआई ने 105 अतिक्रमण हटा दिए हैं। यह जानकारी आज एनएचएआई के अधिकारियों ने हाई कोर्ट में दी। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ में अधिकारियों ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगातार जारी है। वहीं राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को आश्वस्त किया गया कि अतिक्रमण हटाने में एनएचएआई द्वारा मांगी गई किसी भी तरह की प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही अदालत में भांकरोटा फ्लाईओवर बनाने वाली फर्म ने कहा कि हम 31 मार्च तक फ्लाईओवर का काम पूरा कर लेंगे। अदालत ने दोनों के जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए अगली सुनवाई 18 मार्च को तय की है। हाईवे अतिक्रमण फ्री होना चाहिए
दरअसल, जयपुर-अजमेर हाईवे पर अतिक्रमण और फ्लाईओवर के धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्य को लेकर रायचंद चौधरी ने याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने एनएचएआई से अतिक्रमण को लेकर स्टेट्स रिपोर्ट और फ्लाईओवर का निर्माण करने वाली कंपनी से प्रोग्रेस रिपोर्ट तलब की थी। याचिकाकर्ता के वकील धर्मेंद्र चौधरी, कमलेश रोज और सीमा रोज ने बताया कि आज अदालत ने रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को निर्देश दिए हैं कि वह इस केस को निरंतर परमादेश (निरंतर जारी रहने वाली याचिका) की तरह ट्रीट करें। जिससे अदालत इसकी मॉनिटरिंग कर सके। वहीं संबंधित एजेंसियों को उचित दिशा निर्देश जारी कर सकें। अदालत ने कहा कि नेशनल और स्टेट हाईवे पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त होने चाहिए।


