भास्कर न्यूज | लुधियाना लुधियाना के बहादुरके रोड से बिहार के मोतीहारी जा रही ओवरलोड बस सोमवार को लखनऊ में पलट गई थी। जिससे पांच यात्रियों की मौत हो गई थी और 40 घायल हो गए थे। हालांकि मामले की जांच परिवहन विभाग लखनऊ कर रहा है लेकिन दैनिक भास्कर की जांच में सामने आया कि बस के करीब 47 चालान पहले से हो रखे थे। जिसके बाद भी बस सड़क पर दौड़ रही थी। मंगलवार को भी शहर से यूपी, बिहार समेत अलग-अलग राज्यों के लिए ओवरलोड बसे रवाना हुई। दैनिक भास्कर की टीम ने पड़ताल की तो बस चालक छत पर सामान लोड कर ले जा रहे थे। लेकिन ट्रांसपोर्ट विभाग की तरफ से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। औद्योगिक नगरी से प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्लीपर बसें विभिन्न राज्यों के लिए रवाना होती हैं। लेकिन इन बसों में यात्रा के दौरान सुरक्षा के दावे उस समय हवा होते दिखते हैं, जब बसों की छतों पर भारी-भरकम सामान लदा हुआ दिखाई देता है। यह न केवल यातायात नियमों का सीधा उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों और अन्य वाहन चालकों की जान के लिए भी बड़ा खतरा बना हुआ है। शहर के नव नियुक्त आरटीओ मनकंवल सिंह चाहल ने इस बाबत बताया कि उन्होंने आज ही चार्ज संभाला है। पहले किस अधिकारी की क्या भूमिका रही है वह नहीं जानते, लेकिन जो भी वाहन नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ बनती वाजिब कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी नियम तोड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। लुधियाना के व्यस्त मार्गों और हाईवे पर जगह-जगह बिजली की तारें और कम ऊंचाई वाले पुल मौजूद हैं। छत पर सामान होने से बस की ऊंचाई निर्धारित सीमा से अधिक हो जाती है, जिससे अक्सर तारें टूटकर गिरने या सामान के टकराने से हादसे होने का डर बना रहता है। विभाग की तरफ से औपचारिकता के लिए चेकिंग की जाती है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और बाईपास पर अक्सर पुलिस और परिवहन विभाग की गाड़ियों के सामने से ये बसें सामान लादे हुए गुजरती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। रेलवे स्टेशन में रात 11 बजे यात्रियों की भीड़ थी। वहां पर जाने वाली स्लीपर बसों में चालक सामान लोड कर रहे थे। साथ ही बस के अंदर सवारियां फुल थी। फिर भी कुछ यात्री अतिरिक्त बैठाए जा रहे थे। सब्जी मंडी के पास दोपहर 1.25 बजे बसें छत के ऊपर सामान रखे हुए थे। साथ ही सवारियां बैठा रही थी। लखनऊ के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन आलोक कुमार यादव ने बताया कि बस के 47 से अधिक चालान हुए है।


