लोग हुए जागरुक ​​​​​​​:15 दिन में हार्ट, लकवा, श्वांस के 989 मरीज पहुंचे अस्पताल, पिछले साल से कम

दिसंबर के दूसरे पखवाड़े से सर्दी शबाब पर आ गई है। तेज सर्दी के चलते हार्ट और ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ने लगे हैं। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल सहित निजी अस्पतालों की इमरजेंसी में दिसंबर के 15 दिन में 989 मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचे हैं। इन मरीजों में हार्ट और लकवा के अलावा श्वांस के मरीज भी शामिल हैं। राहत की बात यह है कि पिछले साल की अपेक्षा इस साल मरीजों का आंकड़ा 196 मरीज कम है। पिछले साल इन दिनों में 1185 मरीज बीमार हुए थे। डॉक्टर मरीजों को इलाज के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। सर्दी का मौसम शुरू होते ही पुरानी बीमारियों जैसे बीपी, डायबिटीज, ह्रदय रोग, श्वांस, दमा तथा अस्थमा के मरीजों पर सबसे ज्यादा अटैक पड़ रहा है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों में से 30-45 प्रतिशत इसी तरह के हैं। रोज 30 से 35 मरीज आ रहे हैं। इनमें से कई मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। रात में स्ट्रोक के मरीज सबसे ज्यादा आ रहे हैं। कारण कि इसी समय स्ट्रोक का सबसे अधिक खतरा रहता है। पिछले एक सप्ताह में जिले के कई लोगों की हार्ट अटैक से मौत हुई है। इमरजेंसी में पिछले सप्ताह से ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है। यानी हल्की सर्दी के साथ सुबह और देर रात की गलन ने दिक्कत बढ़ाई है। तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण वायरल बढ़ा फिजिशियन एवं सर्जन डॉ. संजीव मुखारया ने बताया कि सर्दी के दिनों में शरीर में खून का संचार कम हो जाता है। साथ ही प्रदूषण, स्मॉग, स्मोक से दिक्कतें बढ़ जाती हैं। इससे अस्थमा का अटैक पड़ सकता है। सांस संबंधी किसी भी बीमारी के मरीज को बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करना चाहिए। इस साल तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण सर्दी और वायरल बुखार के मरीज भी बढ़े हैं। कोरोना काल के बाद हार्ट, बीपी, लकवा के मरीजों में इजाफा हुआ है। इसकी वजह कोरोना के इलाज में बड़ी मात्रा में स्टेरॉयड दवाओं का उपयोग किया जाना है। इससे हृदय पर दबाव बढ़ा है। शरीर के अन्य अंग भी प्रभावित होते हैं। पिछले साल की अपेक्षा इस साल मरीजों का आंकड़ा कम होना लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता को दर्शाता है। एकदम ठंडे से गर्म व गर्म से ठंडे माहौल में नहीं जाएं मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. मनीष जैन ने बताया कि इन दिनों रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं। दिल का काम बहुत बढ़ जाता है। ऐसे में गलत खानपान, तला या भुना, अधिक मसालेदार खाने से दिक्कत हो सकती है। हृदय और श्वांस संबंधी बीमारियों के मरीज बढ़ने की एक वजह कोविड काल और प्रदूषण भी है। इसकी वजह से खराब हुए फेफड़े भी इन बीमारियों के लिए कुछ हद तक जिम्मेदार हैं। इलाज से ज्यादा इन बीमारियों से बचाव पर ध्यान देने की जरूरत है। इस मौसम में लोग ठंड से बचें। इन दिनों सिंचाई का सीजन चल रहा है। नमी वाली जगह में रहने के दौरान सावधानी रखें। एकदम ठंडे से गर्म और गर्म से ठंडे वातावरण में जाने से बचना चाहिए। सबसे ज्यादा आ रहे हैं। कारण कि इसी समय स्ट्रोक का सबसे अधिक खतरा रहता है। पिछले एक सप्ताह में जिले के कई लोगों की हार्ट अटैक से मौत हुई है। इमरजेंसी में पिछले सप्ताह से ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है। यानी हल्की सर्दी के साथ सुबह और देर रात की गलन ने दिक्कत बढ़ाई है।

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