कर गईं आज सूनी गली बेटियां, छोड़ बाबुल के घर को चली बेटियां। अपने आंसू सभी से छुपाती हैं वो, हम समझते हैं कि बेटी रोती नहीं… आदि दर्जनों कविताओं से कोटा के हास्यरस आदित्य जैन ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। मौका था रंगोत्सव के मौके पर रविवार को मारवाड़ी भवन हरमू में हास्य कवि सम्मेलन का। कवयित्री नागपुर श्रद्धया शौर्या पीपुल ने हास्यरस की कई कविताएं सुना कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं वीरता की गाथा, पौरुष की नई निशानी थी, रानी मर्दानी क्यों होती, जब रानी स्वयं भवानी थी। आगे उन्होंने कहा सुनो! के कैसे जली पद्मिनी, शील बचाने की खातिर और तुमने सारी शर्म बेच दी, रील बनाने की खातिर। डॉ. सुनील जोगी ने देशभक्ति के रंग में रंगे ये शब्द कहे: “यह बात एकदम सांची है कि उनकी कराची से अच्छी हमारी रांची है।” भीड़ में दुनिया के पहचान बनाए रखना, घर में खुशियों की एक दालान बनाए रखना, अपने होठों पे ये मुस्कान बनाए रखना और इस दिल में हिंदुस्तान बनाए रखना। डॉ. जोगी की कविताएं और पैरोडीज वर्तमान वैश्विक और राजनीतिक विषयों पर आधारित रही।
ये हुए शामिल… कवि सम्मेलन में देश के सुप्रसिद्ध व प्रख्यात कवि-कवित्रियों का आगमन हुआ। इसमें अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कवियों- श्रृंगाररंस विष्णु सक्सेना यूपी, सुनील जोगी नई दिल्ली, हास्यरस ख्याली शरण राजस्थान, हास्यरस श्रद्धया सोर्या पीपुल नागपुर, वीररस पार्थ नवीन प्रतापगढ़ ने अपनी प्रस्तुति दी। मौके पर विधायक सीपी सिंह, पवन पोद्दार, अंजय सरावगी, पवन शर्मा, सुरेश चंद्र अग्रवाल, ललित कुमार पोद्दार, विनोद कुमार जैन, अशोक नारसरिया, पुनीत पोद्दार समेत सैकड़ों लोग शामिल थे।


