महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में फर्जी हाजिरी पर रोक लगाने कोरिया जिले में फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली लागू कर दी गई है। अब पंजीकृत श्रमिकों की उपस्थिति कार्यस्थल पर फेस रीडिंग के माध्यम से दर्ज की जा रही है, जिससे केवल वास्तविक और मौके पर मौजूद मजदूरों की ही हाजिरी लग सकेगी। जिले में 55 हजार पंजीकृत मनरेगा श्रमिक है। मौके पर रोजगार सहायक अब फेस रीडिंग से हाजिरी लगा रहे हैं। यहां बता दें कि इससे पहले हाजिरी में फर्जीवाड़े को रोकने मास्टर रोल सिस्टम लागू किया था, लेकिन पंचायत स्तर पर इसमें भी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्रालय नई दिल्ली और कमिश्नर मनरेगा तारण प्रकाश सिन्हा के निर्देश पर जिले में नई तकनीक आधारित व्यवस्था शुरू की गई है। कोरिया जिले की सभी ग्राम पंचायतों में संचालित कार्यों में लगे श्रमिकों की ऑनलाइन उपस्थिति अब एनएमएमएस एप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया से दर्ज की जा रही है। यह व्यवस्था सभी निर्माण एजेंसियों के अंतर्गत चल रहे कार्यों में भी अनिवार्य रूप से लागू कर दी है। जिला और जनपद स्तर के प्रोग्रामरों को पूर्व में प्रशिक्षण दिया, जिन्होंने तकनीकी सहायकों, रोजगार सहायकों, बीएफटी और मेट को भी प्रशिक्षित किया है। ई-केवाईसी प्रक्रिया के तहत जिले के लगभग 55 हजार पंजीकृत श्रमिक परिवारों का सत्यापन पूरा कर लिया है। श्रमिकों के आधार कार्ड और बैंक खातों के अनुसार डेटा अपडेट किया है। अब प्रत्येक पंजीकृत श्रमिक के लिए जॉब कार्ड का सत्यापन और नवीनीकरण अनिवार्य कर दिया है। 1 मार्च 2026 से लागू नए नियमों के तहत केवल उन्हीं श्रमिकों के नाम मस्टररोल में शामिल किए जाएंगे, जिनका ई-केवाईसी पूरा होगा।


