सिटी रिपोर्टर | रांची चालीसाकाल का समय ईसाई समुदाय में एक महत्वपूर्ण समय होता है। इसकी शुरुआत राख बुधवार से होती है। इस बार 5 मार्च से चालीसाकाल की शुरुआत हो रही है। राख बुध की विधि के साथ ही मसीही समुदाय 40 दिनों के महाउपवासकाल में प्रवेश करेंगे। राख बुध के दिन विश्वासियों के माथे पर राख से माथे पर क्रूस का चिह्न बनाया जाएगा। महाउपवासकाल के दौरान विश्वासी येसु के दुखभोग के घटनाक्रम को याद करेंगे। शहर के तीनों प्रमुख चर्चों कैथोलिक कलीसिया, जीईएल चर्च और सीएनआई चर्च अपने नियमों के अनुसार 40 दिनों तक विनती प्रार्थना के साथ उपवास और दान करेंगे। क्रूस रास्ता, खजूर रविवार, गुड फ्राइडे के बाद ईस्टर मनाएंगे। मेन रोड स्थित क्राइस्ट चर्च में भस्म बुधवार की पहली आराधना सुबह 6.30 बजे होगी। आराधना पादरी आलोक मिंज कराएंगे, वहीं उपदेशक पादरी जॉर्ज केरकेट्टा होंगे। दूसरी आराधना शाम 5.30 बजे होगी। अनुष्ठाता पादरी निशांत गुड़िया और उपदेशक बिशप सीमांत तिर्की होंगे। बहुबाजार स्थित सीएनआई चर्च में भस्म बुधवार की पहली आराधना सुबह 6.15 होगी। अनुष्ठाता रेव्ह डेविड, रेव्ह जे भुईंया,रेव्ह जे भेंगरा होंगे। दूसरी आराधना 11 बजे होगी, जिसमें अनुष्ठाता रेव्ह वी कुजूर, रेव्ह यूजे सांगा, रेव्ह एसई भुईंया होंगे। वहीं तीसरी अराधना शाम 5.30 होगी, इसमें बिशप बीबी बास्के, रेव्ह डेविड, रेव्ह वी कुजूर, रेव्ह जे कुजूर, रेव्ह ए डाहंगा, रेव्ह एस भुईंया, रेव्ह जी डाहंगा और रेव्ह एसएस मुर्मू अनुष्ठाता होंगे।


