छात्राएं बोलीं- कॉलेज खोलना अच्छा कदम, पर रोजगार भी मिले, सरकारी कर्मी बजट से निराश

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सोमवार को 2025-26 का बजट पेश किया। इसमें युवाओं के लिए कई घोषणाएं की गई हैं। इससे छात्र-छात्राएं उत्साहित हैं। उनमें उम्मीद जगी है कि अब उच्च शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाने वाले छात्रों की संख्या घटेगी। झारखंड के स्टूडेंट्स यहीं बेहतर शिक्षा पा सकेंगे। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि रोजगार के अवसर को भी सुनिश्चित करना चाहिए था। बेहतर परीक्षा प्रणाली पर भी सरकार का फोकस होना चाहिए। दूसरी ओर, राज्य के कर्मचारी बजट से थोड़े निराश दिखे। उनका कहना था कि सरकारी कर्मचारियों की कई मांगें थीं, लेकिन बजट में इस दिशा में कदम नहीं उठाया गया। दोपहर 2 बजे रांची वीमेंस कॉलेज परिसर में एक जगह जमा होकर साइंस और कॉमर्स की छात्राएं मोबाइल फोन पर बजट देखती और आपस में चर्चा करती दिखीं। फैशन डिजाइनिंग विभाग की छात्रा श्रेया गुनगुन ने कहा कि इस बार के बजट में रांची, जमशेदपुर, पलामू, धनबाद, हजारीबाग व देवघर में स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मास कम्युनिकेशन की स्थापना करने की बात कही गई है। टेक यूनिवर्सिटी और स्किल यूनिवर्सिटी के खुलने से युवा पढ़ाई के लिए पलायन नहीं करेंगे। सरकार का यह बजट सराहनीय है। उसकी बात को बीच में ही काटते हुए छात्रा दीपशिखा ने कहा कि टेक कॉलेज और वोकेशनल कोर्स शुरू करने से ज्यादा जरूरी नौकरी के लिए अवसर देना है। पढ़ाई के लिए पलायन तो रूपक जाएगा, लेकिन राज्य में पेपर लीक, भ्रष्टाचार और परीक्षा में अनियमितता युवाओं को पलायन के लिए मजबूर कर रहा है। बजट में रोजगार के अवसर को भी सुनिश्चित करना चाहिए था। सरकारी कर्मी बोले- हमें ढेरों उम्मीदें थीं, पर कुछ नहीं मिला सरकारी कर्मचारी दोपहर करीब 2:15 बजे समाहरणालय में सरकारी कर्मचारी एक जगह जमा होकर बजट पर चर्चा करते ​दिखे। उनका कहना था कि राज्य बजट से हम लोगों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन कर्मचारियों के लिए कुछ नहीं है। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के सहायक महामंत्री जसीम अहमद अंसारी ने कहा कि राज्य के विभिन्न स्तर के कर्मचारी अपनी मांगों की पूर्ति के लिए सरकार के समक्ष गुहार लगाते रहे हैं। प्रदर्शन व आंदोलन भी किया। उन सभी को बजट से निराशा हाथ लगी है। कर्मियों की मांगों में सातवें वेतन आयोग लागू करने, वेतन विसंगति को दूर करने समेत अन्य शामिल थीं। बजट में इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। डीए 50 फीसदी करने के बारे में भी कही गई थीं, इस पर भी बजट में कुछ नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्रों को सुदृढ़ कर रही है, सरकार का यह कदम सराहनीय छात्रा वाणी ने कहा कि पहले भी कई बजट पेश किए गए है। इस बार का बजट लड़कियों और महिलाओं के लिए अच्छा है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने की जरूरत है। मंईयां सम्मान योजना की राशि भी लाभुकों को नहीं मिल रही है। पिछले साल की स्कॉलरशिप भी नहीं दी गई है। ऐसे में सरकार की ओर से प्रस्तावित बजट पर भरोसा कर पाना आसान नहीं है। छात्रा मनीषा वर्मा ने कहा कि लड़कियों को शिक्षित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार सबसे निचली स्तर से शुरुआत कर रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों को सुदृढ़ कर रही है, सरकार का यह कदम सराहनीय है। छात्रा मनीषा, पूर्णिमा, रागिनी, हर्शिखा, मुन्नी, रिद्दिमा, साक्षी, बरखा, पुष्पांजलि, रितिका, वाणी ने भी बजट को लेकर अपने विचार रखे।

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