भास्कर न्यूज | अमृतसर कोट खालसा सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छठी कक्षा की छह छात्राओं ने ऐसा कमाल कर दिखाया कि पूरे देश में उनकी तारीफ हो रही है। उन्होंने घर के कूड़े को बेकार समझकर फेंकने की बजाय उसे काम की चीजों में बदल दिया। उनकी इस शानदार सोच और मेहनत ने 15 राज्यों की 1550 टीमों को पीछे छोड़ दिया और उन्हें बेंगलुरु में ‘विप्रो अर्थियन नेशनल अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। इस प्रतियोगिता में सरकारी, प्राइवेट और एडिड स्कूलों के बच्चों ने हिस्सा लिया था, लेकिन कोट खालसा की छात्राओं के प्रोजेक्ट ने सबको पछाड़ दिया। प्रतियोगिता में इनाम पाने वाली 23 टीमों में से यह पंजाबी की इकलौती टीम रही। जीत के बाद इन छात्राओं को पहली बार हवाई सफर करने का मौका भी मिला, जो उनके लिए किसी सपने जैसा था। इसके अलावा, स्कूल को इनाम के रूप में राशि भी मिली, जिससे आगे भी ऐसे इनोवेटिव प्रोजेक्ट बनाए जा सकें। इन छात्राओं ने न सिर्फ कूड़े से नई चीजें बनाईं, बल्कि लोगों को भी सिखाया कि कूड़ा फेंकने की बजाय उसे दोबारा कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने पोस्टर तैयार किए और जागरूकता अभियान चलाकर आसपास के लोगों को समझाया कि कूड़ा भी काम की चीज बन सकता है। इस प्रोजेक्ट को पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी का भी समर्थन मिला। छात्राओं ने अपनी साइंस टीचर पलविंदर कौर की गाइडेंस में इस प्रोजेक्ट को चार महीने तक लगातार मेहनत करके तैयार किया। उन्होंने गीले और सूखे कूड़े को अलग करके उसे दोबारा इस्तेमाल करने लायक बनाया। कूड़े से बायो-प्लास्टिक, जैविक कीटनाशक पेपर, कंपोस्ट, पेन होल्डर, डस्टबिन और यहां तक कि वैक्यूम क्लीनर तक बना डाला। वे छुट्टी वाले दिन भी प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए स्कूल आते थे। प्रोजेक्ट तैयार करने वाली छात्रा चांदनी, सोनाक्षी, प्रभजोत कौर, अनमोलदीप कौर और दीपिका और साइंस मिस्ट्रेस पलविंदर कौर से डीसी साक्षी साहनी ने बुधवार को मुलाकात कर उनका अनुभव साझा किया। यह जीत कोट खालसा स्कूल के लिए बहुत गर्व की बात है और यह साबित करती है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं, बस उन्हें सही दिशा और मौका मिलना चाहिए।


