वंचित वर्ग अधिकार संघर्ष समिति ने रथ यात्रा निकाली:आरक्षण के उप वर्गीकरण की मांग, बोले- सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पालना करें सरकार

दौसा जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को वंचित वर्ग अधिकार संघर्ष समिति द्वारा रथ यात्रा निकालकर आरक्षण के उप वर्गीकरण को लेकर आवाज बुलंद की। दोपहर को जिला अस्पताल के पास स्थित जंगाली गिरी आश्रम से रवाना हुई रथ यात्रा लालसोट रोड व आगरा रोड से कलेक्ट्रेट पहुंची। जहां नारेबाजी की गई, इसके बाद प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपकर बताया कि सुप्रीम कोर्ट की सात न्यायधीशों की पीठ द्वारा (6-1 से) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति भील, गरासिया, सहरिया के उप-वर्गीकरण का फैसला दिया गया था। उन्होंने बताया कि राजस्थान में राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक, प्रशासनिक हर दृष्टिकोण से कमजोर वाल्मीकी, मेहतर, सांसी, कंजर, नट, ढोली, बाजीगर, सपेरा, मदारी, कालबेलिया, बावरी भांड, धानक, कामड़ व अन्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति भील गरासिया सहरिया वर्ग में सामाजिक रूप से अत्यधिक पिछड़ी हुई जाति है। इनके साथ अधिकतर छुआछूत, जातिगत, उत्पीड़न आर्थिक विषमता, शैक्षणिक आधार पर अत्यधिक पिछड़ी हुई है। कमेटी गठित कर 90 दिन में सर्वे करने की मांग अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रदेश अध्यक्ष विकास नरवार, संरक्षक दुलीचंद भील, यूथ विंग प्रदेश अध्यक्ष धर्मीचंद भील ने बताया- इसके लिए राज्य स्तरीय कमेटी बनाकर वाल्मीकी समाज एवं अन्य दलित समाज के हित में 90 दिन में सर्वे रिपोर्ट के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का क्रियान्वयन, पारदर्शिता से किया जाए। साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति भील गरासिया सहरिया में कई उपजातियां है। उन्हें समरूप नही कहा जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने भी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों भील गरासिया सहरिया को भी एक समरूप नहीं माना है। संविधान भी राज्य सरकार को इन जातियों के पिछड़ेपन का उन्मूलन करने का विशेष शक्तियां प्रदान करता है। जिसे राज्य सरकार द्वारा लागू किया जाना चाहिए। रैली में बड़ी संख्या में महिला और युवा बाइक पर तिरंगा लेकर चल रहे थे।

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