भास्कर न्यूज | कवर्धा साइबर अपराध पर लगाम लगाने कबीरधाम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। फर्जी सिम कार्ड जारी करने वाले कवर्धा के दो पाइंट ऑफ सेल्स एजेंट (पीओएस) गिरफ्तार किए गए हैं। ये आरोपी साइबर ठगों को फर्जी सिम बेचकर ऑनलाइन ठगी को बढ़ावा दे रहे थे। राजस्थान, महाराष्ट्र और यूपी के साइबर ठगों से इन एजेंटों के तार जुड़े हैं। गिरफ्तार आरोपी भूपेंद्र जोशी और दुष्यंत जोशी सगे भाई हैं। ये मूल रूप से ग्राम इंदौरी, थाना पिपरिया (जिला कबीरधाम) के निवासी हैं। वर्तमान में ज्योतिबा फुले वार्ड कवर्धा में रह रहे थे। जांच में सामने आया कि इन्होंने कुल 85 फर्जी सिम जारी किए। आरोपी भूपेंद्र ने 48 और दुष्यंत ने 37 सिम बेचे। इनमें से 20 सिम का इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी के 45 मामलों में हुआ। इन सिम कार्डों से अब तक 14,18785 रुपए की ठगी हो चुकी है। आईजी दीपक कुमार झा के निर्देश पर साइबर सेल की विशेष टीम ने यह कार्रवाई की। कोतवाली पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4), 61(2) और आईटी एक्ट की धारा 66(सी) के तहत एफआईआर दर्ज किया है। मामले की जांच में संगठित साइबर ठगी उजागर हो गई एनसीसीआरपी और समन्वय पोर्टल के जरिए साइबर अपराधों की जांच में बड़ा खुलासा हुआ। कबीरधाम जिले से संचालित कुछ एजेंट बड़ी संख्या में फर्जी सिम कार्ड जारी कर रहे थे। इनका इस्तेमाल बैंकिंग धोखाधड़ी, ऑनलाइन ठगी, फिशिंग और सोशल मीडिया ब्लैकमेलिंग में हो रहा था। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और खुफिया जानकारी के आधार पर आरोपियों को चिन्हित कर गिरफ्तार किया। आरोपी फर्जी दस्तावेज के जरिए सिम जारी कर साइबर अपराधियों को बेचते थे। { आधार, पैन या अन्य सरकारी दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को न दें। { अपने आधार से लिंक मोबाइल नंबरों की नियमित जांच करें। { अगर संदेह हो कि आपके नाम पर फर्जी सिम जारी हुआ है, तो तुरंत साइबर सेल में शिकायत करें। { हेल्पलाइन नंबर की लें मदद। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (https://cybercrime. gov.in) पर करें। किसी भी ठगी की सूचना हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें। डीएसपी कृष्ण कुमार चंद्राकर ने बताया कि दोनों आरोपी कबीरधाम के अलग- अलग बाजारों में जाकर लोगों के नाम पर सिम बेचते थे। जब कोई ग्राहक सिम कार्ड लेने आता, तो वे एक ही नाम पर दो सिम जारी कर लेते। एक सिम ग्राहक को देते और दूसरा फर्जी सिम अपने पास रखते थे। बाद में ये सिम साइबर अपराधियों को बेच दिए जाते। फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने के एवज में ये पीओएस एजेंट 500 से 1000 रुपए कमीशन लेते थे। बड़ी साजिश का पर्दाफाश होने के बाद सभी नंबर बंद कराए पुलिस जांच में सामने आया कि 85 मोबाइल नंबरों के कॉल डाटा रिकॉर्ड से सभी छत्तीसगढ़ सर्किल में सक्रिय हुए थे। लेकिन इनका इस्तेमाल उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और झारखंड में साइबर ठग कर रहे थे। एक ही टावर लोकेशन से इन सिम कार्डों की सक्रियता मिली, जिससे यह एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा साबित हुआ। भारत सरकार के दूरसंचार मंत्रालय ने इन 85 नंबरों को साइबर अपराध में लिप्त पाते हुए सेवा प्रदाता कंपनियों को नोटिस देकर बंद करवा दिया।


