सावन में दही-लस्सी का सीमित सेवन ही रहता है फायदेमंद

भास्कर न्यूज। लुधियाना सावन का महीना हरियाली और त्योहारों के साथ खानपान में भी कई बदलाव लेकर आता है। इस दौरान कई घरों में दही, लस्सी और अन्य ठंडी तासीर वाली चीजों का सेवन कम कर दिया जाता है। यह मान्यता केवल परंपरा नहीं, बल्कि आयुर्वेद और मौसम से जुड़े कारणों पर भी आधारित है। विशेषज्ञों के अनुसार सावन में लगातार बारिश और बढ़ी हुई नमी के कारण पाचन तंत्र अपेक्षाकृत कमजोर हो जाता है। ऐसे में दही और लस्सी जैसी चीजें कुछ लोगों में अपच, गैस, पेट फूलना या गले की समस्या बढ़ा सकती हैं। आयुर्वेद में भी वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति कमजोर मानी गई है, इसलिए भारी और अत्यधिक ठंडी चीजों से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को दही पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। जिन लोगों का पाचन ठीक है, वे सीमित मात्रा में दिन के समय ताजा दही खा सकते हैं। रात में दही खाने से बचना बेहतर माना जाता है। यदि दही खाना हो तो उसमें भुना जीरा, काली मिर्च या सेंधा नमक मिलाकर खाना अधिक उपयुक्त माना जाता है। सही मात्रा और सही समय पर दही का सेवन बेहतर विकल्प : पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि सावन में ताजा, हल्का और घर का बना भोजन अधिक लाभदायक रहता है। पर्याप्त पानी पीना, मौसमी फल, हरी सब्जियां और संतुलित आहार लेना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने में मदद करता है। सावन में दही और लस्सी से पूरी तरह परहेज जरूरी नहीं है। यह व्यक्ति की पाचन क्षमता और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। ताजा दही सीमित मात्रा में दिन के समय लिया जा सकता है, लेकिन बासी या बहुत ठंडी डेयरी चीजों से बचना बेहतर रहता है।

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