ग्राम पंचायत सोमलपुर: कामकाज में सामने आई 68.23 लाख की अनियमितता, उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश

ग्राम पंचायत सोमलपुर के कामकाज में अनियमितता का मामला सामने आया है। दो वार्ड पंचों की संपर्क पोर्टल पर की गई शिकायत के बाद हुई जांच में 67 लाख 23 हजार के कार्य बिना सक्षम स्वीकृति निविदा व मूल्यांकन के करवाया जाना पाया गया है। पंचायत समिति अजमेर ग्रामीण के सहायक विकास अधिकारी भंवरलाल विश्नोई, अनूप शर्मा तथा एईएन सत्य प्रकाश जानू ने वर्ष 2022-23 से 2024-25 (12 जून 2024) तक रोकड़ में दर्ज खर्चे की जांच की। प्रथम दृष्ट्या जांच में सरपंच छोगानाथ व तत्कालीन वीडीओ ने बिना निविदा और मूल्यांकन के राशि खर्च की। इसलिए सक्षम स्तर पर लेखाधिकारी व एईएन स्तर के अधिकारियों की टीम गठित कर विस्तृत जांच करवाई जाए। ऐसा कोई इश्यू नहीं था। मुझे जांच के लिए नहीं बुलाया, मुझे कोई फोन नहीं हुआ। मैं काम करवाता हूं। पहले भी शिकायत की गई थी। -छोगा नाथ, सरपंच, जांच कमेटी के अनुसार 2022-23 में 18 लाख 33674 के 35 कार्य बिना स्वीकृति व मूल्यांकन निविदा के करवाए। 2023-24 में 36 लाख 21447 के 51 कार्य तथा 2024-25 में 12 लाख 67894 के 20 कार्य राशि बिना स्वीकृति व मूल्यांकन निविदा के करवाए गए। जांच कमेटी के अनुसार सरपंच बयान दर्ज कराने नहीं आए। इस तरह का मामला संज्ञान में आया है। जांच करवाई जाएगी। अनियमितता है तो एक्शन लेंगे। – अभिषेक खन्ना, सीईओ, जिला परिषद, अजमेर ग्राम पंचायत के वार्ड नंबर 9 के वार्ड पंच कमरुद्दीन तथा वार्ड 1 के वार्ड पंच इरफान खान ने 21 जनवरी 2021 से वर्तमान तक बिना कार्य करवाए बिना निविदा,बिना स्वीकृति के लाखों रुपए के फर्जीवाड़े की शिकायत राजस्थान संपर्क पोर्टल पर की। जांच व कार्रवाई की मांग की गई। इरफान की शिकायत में बताया गया कि ग्राम पंचायत सोमलपुर में सरपंच और ग्राम सेवक ने वर्ष 2021-22 में 9 लाख 69 हजार 815 रुपए और वर्ष 2022-23 में 39 लाख 98 हजार 347 रुपए, वर्ष 2023-24 में 36 लाख 61 हजार रुपए, वर्ष 2024-25 में 12 लाख 63 हजार 894 रुपए कुल 98 लाख 93 हजार 203 रुपए बिना स्वीकृति के पंचायत के अकाउंट से निकाले गए। इस परिवाद का 15 दिसंबर को खंड विकास अधिकारी ने परिवादी से संपर्क नहीं होने का हवाला देकर िनस्तारित कर दिया। वार्ड 10 में करवाए गए कार्यों की जांच की मांग की गई। इन कार्यों की जेईएन ने मौका व गुणवत्ता जांच की। इसमें किसी तरह की अनियमितता व गुणवत्ता संबंधी कमी नहीं पाई गई।

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