भास्कर न्यूज | कवर्धा कबीरधाम जिले के जंगल जल रहे हैं। बीते 14 दिन में 47 जगहों पर आगजनी की घटनाएं हुई हैं, जो कि राजनांदगांव और बालोद जिले के मुकाबले ज्यादा है। सोमवार को ही कवर्धा, सहसपुर लोहारा और पंडरिया पूर्व रेंज में 9 जगहों पर आग लग गई, जिसे शाम तक बुझाया नहीं जा सका था। आगजनी के कारण जंगल में पेड़-पौधे सुलग रहे हैं। हर साल 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन रहता है। इस दौरान जंगल में आग लगने की घटनाएं होती है। फारेस्ट मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एफएमआईएस) के मुताबिक अब तक कबीरधाम जिले में जंगल में 41 जगहों पर आग लगने की घटनाएं हो चुकी है। जो कि दीगर जिलों की तुलना में ज्यादा है। एफएमआईएस के अनुसार अब तक बालोद जिले के जंगल में 33, खैरागढ़ के जंगल में 51 और राजनांदगांव के जंगल में 30 जगहों पर आग लग चुकी है। वहीं मोहला के जंगल में सबसे ज्यादा 137 जगहों पर आग लगने की घटनाएं हुईं है। 2024 में इस अवधि में कबीरधाम के जंगल में आगजनी के सिर्फ 16 मामले आए थे। 3. जंगल में आग पर काबू पाने 70 से ज्यादा ब्लोअर मशीनें दी गई है। पिछले 5 साल के डेटा का अध्ययन कर जंगल में जहां सबसे अधिक आग लगने की घटनाएं हुईं, वहां फायर वॉचर और ब्लोअर मशीन ज्यादा दिए हैं। 2. इस बार जंगल में लगी आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग और वन विकास निगम संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। अलग- अलग रेंज में अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी गई है। इस सीजन 10 मार्च को एक ही दिन में सबसे ज्यादा 9 जगहों पर आग लगने घटनाएं हुई है। सहसपुर लोहारा रेंज के भलपहरी बीट क्रमांक- 222, सोनझरी बीट क्रमांक- 275 में दो जगह, कवर्धा रेंज के केसदा ईस्ट बीट क्रमांक- 107, मंडला कोना बीट क्रमांक- 100, थुवापानी बीट क्रमांक- 69 में दो जगह, पंडरिया ईस्ट रेंज के चतरी बीट क्रमांक- 528 और महिडबरा बीट क्रमांक- 486 में आग लगने की सूचना मिली है। वन अमला आग बुझाने में जुटा हुआ है। लेकिन इस पर काबू नहीं पाया जा सका है। डीएफओ शशि कुमार ने कहा कि 15 फरवरी से 15 जून तक जंगल में आग लगने की घटनाएं होती हैं। रोकथाम के लिए वन कर्मचारियों के साथ फायर वॉचर तैनात किए गए हैं। 70 से ज्यादा ब्लोअर मशीनें दी गई हैं, ताकि आगजनी रोकी जा सके। बाकी जिलों की तुलना में यहां आगजनी की घटनाएं कम हैं। कोशिश करेंगे कि कोई बड़ा नुकसान न हो।


