चाईबासा| देश भर के बैंक यूनियनों ने 24 व 25 मार्च को अपनी 12 सूत्री मांगों के कारण देशव्यापी हड़ताल करने की घोषणा कर रखी थी। हड़ताल को लेकर यूनियनों की अंतिम बैठक शुक्रवार को निश्चित थी। देशभर के बैंकरों में शुक्रवार को दिन-भर उहापोह की स्थिति बनी रही। सबका ध्यान नई दिल्ली में हो रहें बैठक पर टिकी हुई थी। नई दिल्ली स्थित मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में डिपार्टमेंटल फाइनेंशियल सर्विस और इंडियन बैंकिंग एसोसिएशन के बीच दिन भर बैठकों का दौर चला। बैठक के दौरान 12 सूत्री मांगों पर गहन चर्चा हुई। बैंक कर्मियों की मुख्य मांगों में सभी कैडर्स में पर्याप्त भर्ती, अस्थायी कर्मियों का नियमितीकरण, पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना, सरकारी हस्तक्षेप व आउटसोर्सिंग रोकना, परफॉर्मेंस रिव्यू व पीएलआई स्कीम वापस लेना, बैंक कर्मियों की सुरक्षा, ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 25 लाख करना, स्टाफ वेलफेयर बेनिफिट्स पर आयकर छूट, सरकार का आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से कम न करना, वित्तीय सेवा विभाग के अत्यधिक हस्तक्षेप रोकना आदि है। बैठक के बाद सी.एच. वेंकटाचलम, जनरल सेक्रेटरी, ए. आई. बी. ई. ए. ने ट्वीट कर जानकारी देते हुए बताया कि इंडियन बैंक एसोसिएशन और डिपार्टमेंटल ऑफ फाइनेंशियल सर्विस के बीच समझौता बैठक सुबह से ही चल रही थी। हमारी मांगों पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक को अप्रैल के तीसरे सप्ताह में फिर से आयोजित करने के लिए हड़ताल स्थगित कर दी गई है। इस सकारात्मक विकास को देखते हुए हमारी हड़ताल को एक या दो महीने के लिए स्थगित करना आवश्यक समझा गया। इस प्रकार 24 और 25 को होने वाली हड़ताल को स्थगित कर दिया गया है।


