महाशक्ति का महापर्व 30 मार्च से… घरों के साथ मंदिरों में विधिवत पूजन कर होगी कलश स्थापना

भास्कर न्यूज | जालंधर माता रानी के चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू हो रहे हैं। इस समय मां दुर्गा की पूजा करना शुभ माना जाता है। विद्वानों के अनुसार, नवरात्र वह समय है, जब दोनों ऋतुओं का मिलन होता है। इस संधिकाल में ब्रह्मांड से असीम शक्तियां ऊर्जा के रूप में हम तक पहुंचती हैं। मुख्य रूप से हम दो नवरात्र के विषय में जानते हैं। चैत्र व आश्विन नवरात्र। चैत्र नवरात्र गर्मियों की शुरुआत करती हैं और प्रकृति प्रमुख जलवायु परिवर्तन से गुजरती है। यह धारणा है कि चैत्र नवरात्र के दौरान एक उपवास का पालन करने से शरीर ग्रीष्म ऋतु के लिए तैयार होता है। मां के नौ रूपों की उपासना का पर्व शुरू होने वाला है। श्रीराम नवमी तिथि 6 अप्रैल को है। इन नौ दिनों में मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है। यूं तो साल में दो बार नवरात्र आते हैं लेकिन दोनों का महत्व व पूजा विधि अलग है। इस साल देवी आराधना पूरे नौ दिन की जाएगी क्योंकि नवरात्रि में किसी भी तिथि का क्षय नहीं हो रहा है। इन पवित्र दिनों में स्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। ये अपने आप में शुभ संयोग है। चैत्र नवरात्रि में खरीदारी के कई मुहूर्त हैं। मौसम परिवर्तन के समय इन नौ दिनों में व्रत-उपवास करना सेहत के लिए अच्छा रहेगा। साथ ही इन दिनों में देवी आराधना से शक्ति बढ़ती है। शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर के पुजारी गौतम भार्गव ने बताया कि इन नौ दिनों में देवी आराधना से सुख और समृद्धि बढ़ती है। मां दुर्गा को सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी कहा गया है। इसलिए नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। जो हर मनोकामना पूरी करने वाले और हर तरह के दोष खत्म होने वाले होते हैं। उन्होंने बताया कि हर नवरात्र में मां दुर्गा अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर आती हैं और विदाई के वक्त भी वाहन अलग होता है। इस बार महाअष्टमी पांच अप्रैल और महानवमी 6 तारीख को मनाई जाएगी। शिव शक्ति मां बगलामुखी धाम के पं. विजय शास्त्री ने बताया कि नवरात्र काल में दुर्गा उपासना का बहुत ही महत्व है। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर नवीन वस्त्र धारण करें। उपासक अपने घर के पवित्र स्थान पर मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ बोएं। इसी वेदी पर तांबे का कलश या मिट्टी का कलश स्थापित करें। मां भगवती की फोटो या मूर्ति रखकर उनका पूजन दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से कर मां को वस्त्र, चंदन, अक्षत, पुष्प अर्पित करें। इसके बाद मां की भव्य आरती कर अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करनी चाहिए। साधक को नौ दिन उपवास रखकर मां की उपासना करनी चाहिए और घर में अखंड ज्योति जरूर जलाएं जो कर्म की साक्षी होती है।

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