स्कूलों में बच्चों के लिए बनने वाले मध्याह्न भोजन में तेल के उपयोग में 10% की कमी लाएं। इस संबंध में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी की है। केंद्र ने सभी राज्यों के शिक्षा विभाग को पत्र भेजा है। जिसमें कहा है कि बच्चों में मोटापा और ओवरवेट की समस्या बढ़ रही है। इस कारण ध्यान देना जरूरी है। एडवाइजरी में खाद्य तेल के अत्यधिक सेवन के प्रतिकूल प्रभावों और मोटापे के संबंध में छात्रों को शिक्षित करने की तत्काल आवश्यकता भी बताई गई है। कहा गया है कि न केवल मध्याह्न भोजन, बल्कि घरों में बननेवाले खाना में भी तेल के इस्तेमाल में 10 प्रतिशत की कमी लाना जरूरी है। इसके लिए शिक्षकों, अभिभावकों, छात्रों और समुदाय के सदस्यों में नए-नए तरीकों से जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। स्कूलों की सभी रसोइया और उनके सहायकों को खाना पकाने में तेल के इस्तेमाल को 10 प्रतिशत तक कमी लाने के लिए प्रशिक्षित देने का भी सुझाव दिया गया है। पत्र में घरों में डीप-फ्राइंग के बजाय ग्रिलिंग, स्टीमिंग या बेकिंग जैसे स्वास्थ्यवर्धक खाना पकाने के तरीके अपनाने पर जोर दिया गया है। स्कूलों के किचन गार्डेन की सब्जियों का उपयोग करें स्कूलों में किचन गार्डेन बनाने और उनमें उगाई गई सब्जियों के उपयोग पर बल दिया गया है। बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन पोषण की दृष्टि से संतुलित बनाने को लेकर पूर्व से ही स्पष्ट गाइडलाइन जारी है। इसमें फोर्टिफाइड चावल, गेहूं, मोटे अनाज, दाले, अंडे और हरी पत्तेदार सब्जियां सम्मिलित हैं। वसा से आवश्यक कैलोरी बनाए रखने के लिए प्राथमिक विद्यालय के छात्रों के लिए पांच ग्राम और उच्च प्राथमिक विद्यालय के छात्रों के लिए 7.5 ग्राम की मापी गई मात्रा में डबल फोर्टिफाइड नमक और फोर्टिफाइड खाद्य तेल (विटामिन ए और डी से समृद्ध) का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है।


