भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा जिले में भारत स्वच्छता मिशन के तहत पहले ग्रामीण क्षेत्रों में 12-12 हजार के शौचालय सभी परिवारों के घर बनाए गए। ये शौचालय इतने घटिया बनाए गए थे कि साल भर में ही जर्जर हो गए थे। जिसके बाद गांवों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया गया। कहीं 2 लाख 20 हजार तो कहीं ढाई लाख खर्च कर यह शौचालय बनाए गए थे पर यह स्कीम भी शासन की फेल होती नजर आ रही है। दंतेवाड़ा में बने 100 से ज्यादा शौचालय इस्तेमाल ही नहीं किए जा रहे हैं, निर्माण के बाद से ही यह बंद पड़े हैं। जिले में सभी 143 पंचायतों में 1-1 शौचालय बनाए गए थे, जिसमें महिला पुरुष के लिए अलग-अलग निर्माण किया गया था, पर जिले के ज्यादातर शौचालय में पानी की सप्लाई की व्यवस्था ही नहीं की गई पर सेनिटरी फिटिंग का कार्य सभी जगह कर दिया गया था। शासन के करोड़ों रुपये सिर्फ दंतेवाड़ा में ही इन शौचालयों को बनाने में खर्च हो गए और इसका इस्तेमाल भी नहीं हो रहा है। जिले में स्वच्छ भारत मिशन के साथ-साथ निर्मल ग्राम के नाम से भी गांवों में शौचालय निर्माण कर पूर्व में पुरस्कार भी जिले को मिल चुका है। जिले को ओडीएफ 100 प्रतिशत खुले में शौच मुक्त का भी पुरस्कार पूर्व में मिल चुका है, पर हकीकत इससे अलग है। जिले में एक भी गांव ओडीएफ नहीं है। डिप्टी डायरेक्टर पंचायत मिथलेश किसान ने बताया जिले में छिंदनार और चितालुर जैसी और भी ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का इस्तेमाल लोग कर रहे हैं, कहीं-कहीं इस्तेमाल नहीं हो रहा है। जिले में शौचालयों के नाम पर भले ही करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हों पर आज भी जिले की 50 प्रतिशत आबादी घटिया शौचालयों के निर्माण की वजह से खुले में जाने को मजबूर है। यह आबादी ग्रामीण क्षेत्रों की है जहां शासन के करोड़ों खर्च के बाद भी इसका फायदा ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है।


