भास्कर न्यूज | जालंधर जिले में एक बार फिर कलेक्टर रेट बढ़ाने को लेकर रिव्यू किया जा रहा है। इस बार मार्केट वेल्यू और कलेक्टर रेट के दरम्यान ज्यादा अंतर न हो, इसके लिए जिला प्रशासन की तरफ से खसरा नंबर भी कलेक्टर रेट में जोड़ा जाने का प्रावधान किया जा रहा है। इसलिए अब सभी सब-रजिस्ट्रार, नायब-रजिस्ट्रार, आरसी, पटवारी और कानूनगो से भी विचार-विमर्श किया जा रहा है और सब-रजिस्ट्रार की तरफ से 10 से 15 फीसदी कलेक्टर रेट बढ़ाया जाना तय माना जा रहा है। सब-रजिस्ट्रार स्तर पर नई प्रपोजल तैयार होने के बाद डीसी की मंजूरी के बाद इसे जिले में लागू किया जाएगा। पिछले साल भी जिला प्रशासन की तरफ से रेवेन्यू बढ़ाने के लिए 5 से 25 फीसदी तक कलेक्टर रेट बढ़ाया गया था। कलेक्टर रेट का मतलब है कि किसी भी प्रॉपर्टी (रेजिडेंशियल, कमर्शियल, एग्रीकल्चर या औद्योगिक) की बिक्री के लिए सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मूल्य, जिससे कम में रजिस्ट्री नहीं हो सकती और उसी पर स्टांप ड्यूटी लगाई जाएगी। मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक ज्यादातर कलेक्टर रेट में खसरा नंबर नहीं लिखा होता है। इसलिए कई बार लोग कॉमर्शियल को रेजिडेंशियल बताकर कम अष्टाम से प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन करवा लेते है। इससे सरकार के अष्टाम की चोरी होती है। लेकिन इस बार सरकार मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रहा ही। खसरा नंबर को जोड़ते हुए उसका कलेक्टर रेट लिखा जाएगा ताकि क्लियरिटी बढ़े और दूसरी तरफ मार्केट वेल्यू और कलेक्टर रेट में ज्यादा अंतर न रहे, इसके लिए भी विचार किया जा रहा है। इस सारी प्रक्रिया से सरकार को अष्टाम से होने वाले रेवेन्यू में बढ़ोतरी होगी। इससे कॉमर्शियल और रेजिडेंशियल में क्लियर होगा कि कहां पर कितना कलेक्टर रेट लगेगा।


