वक्फ बोर्ड में संशोधन नितांत आवश्यक है: डॉ. सलीम राज

भास्कर न्यूज| महासमुंद स्वाध्याय भवन समिति के तत्वावधान में गुरुवार को वक्फ विधेयक 2024 के विषय पर कार्यशाला का आयोजन महासमुंद के स्वाध्याय भवन में किया गया। इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज मुख्यवक्ता के रूप में शामिल हुए थे। इस दौरान वक्फ अधिनियम के दुष्प्रभाव को बताते हुए इसमें प्रस्तावित संशोधन के महत्व और प्रासंगिकता के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. सलीम राज ने वक्फ अधिनियम के दुष्प्रभाव को बताते हुए इसमें प्रस्तावित संशोधन के महत्व और प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने वक्फ का अर्थ बताते हुए कहा की वक्फ का अर्थ होता है दान, न की किसी की संपत्ति को ज़बरदस्ती अपनी संपत्ति घोषित कर देना। वक्फ अधिनियम का अनैतिक फायदा उठाते हुए किसी भी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति घोषित कर देने की वर्तमान प्रणाली को गलत ठहराते हुए उन्होंने इसमें संशोधन को कानून सम्मत बताया। उन्होंने वक्फ अधिनियम में संशोधन से पारदर्शिता बढ़ने की बात की। वक्फ बोर्ड में सनातनी की सदस्यता व महिला की सहभागिता की बात पर उन्होंने कहा कि ये संशोधन नितांत आवश्यक है। जब पाकिस्तान की प्रधानमंत्री महिला हो सकती है तो बोर्ड में महिला क्यों नहीं हो सकती। बोर्ड में यदि सनातनी सदस्य होंगे तो किसी सनातनी व मुसलमान की संपत्ति जिसमें वो चार पीढ़ी से रह रहा है, उसे गलत तरीके से वक्फ संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकेगा। वक्फ काउंसिल के आदेश के विरुद्ध न्यायालय में अपील करने का अधिकार आम आदमी को इस संशोधन में प्रस्तावित है, जोकि न्यायसंगत है। मुसलमानों को याद दिलाया कि उनके पूर्वज भी मूर्तिपूजक ही थे। इस मौके पर भूपेंद्र राठौड़, महेश चंद्राकर, लक्ष्मीकांत पाणिग्रही, चंद्रशेखर साहू, सीए रितेश गोलछा, डॉ. विमल चोपड़ा, देवीचंद राठी, चन्द्रबदन मिश्रा, गोवर्धन प्रधान, लक्ष्मीकांत तिवारी, राजेश डड़सेना, सुमित ढिल्लों, तिलक साव, एम आर विश्वनाथन, अशोक गिरी गोस्वामी, नरेश मोरयानी, राजेश्वर खरे, सुजाता विश्वनाथन, उत्तरा प्रहरे, प्रमोद चंद्राकर, टेकराम सेन, कन्हैया लाल सोनी, सुशील शर्मा सहित मुसलमान समाज से अनवर हुसैन, शेर मोहम्मद, नईम ख़ान व सभी समाज से अनेक गणमान्य नागरिक म थे। औरंगजेब मुसलमानों का आदर्श नहीं हो सकता डॉ. सलीम राज ने कहा कि औरंगजेब अत्याचारी था और मुसलमानों का आदर्श नहीं हो सकता। मुसलमानों का आदर्श यदि कोई है तो वो डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साहब है। संशोधन विधेयक को उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरगामी सोच का परिणाम बताया। संशोधन के पक्ष में उन्होंने अपना भरपूर समर्थन होने की बात कही।

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