झुमरी तिलैया| कैलाश राय सरस्वती विद्या मंदिर में शुक्रवार को त्रि दिवसीय आचार्य कार्यशाला का उद्घाटन हुआ। उद्घाटन सत्र में स्थानीय समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह, कोषाध्यक्ष नवल कुमार और मुख्य अतिथि के रूप में विद्या भारती के पूर्व विभाग प्रमुख रामावतार साहू उपस्थित थे। तत्पश्चात प्रथम सत्र में प्राचार्य ने विद्यालय के सबल एवं दुर्बल पक्षो पर आचार्यों से राय मांगा। मौके पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया। शैक्षिक एवं सहसैक्षिक पाठ्यक्रम संस्कृत संभाषण सुलेख इत्यादि पर उनके द्वारा प्रकाश डाला गया। तीसरे सत्र में पाठ्यक्रम क्रियान्वयन पर विचार किया गया। चतुर्थ सत्र में पंचपदी शिक्षण पद्धति पर आचार्य प्रदीप कुमार ने कक्षा ली। अंतिम सत्र में अपने मातृ संगठन एवं एवं हमारे दायित्व पर प्राचार्य ने विचार रखे। भास्कर न्यूज़|कोडरमा अलविदा जुमा की नमाज़ लोगों ने पूरे खुशनुदगी के साथ मस्जिदों में अदा किया। रमजान उल मुबारक के अंतिम जुमा पर लोगों ने अल्लाह की बारगाह में सर झुका कर आने वाले अगले वर्ष में रमजान उल मुबारक की बरकत महीना इनायत करने व मुल्क में अमन चैन और भाईचारगी की दुआ मांगी । अलविदा जुम्मा की नमाज अदा करने वाले लोगों में रमजान का बा- बरकत महीना जाने का गम भी देखा गया। जिले के तमाम मस्जिदों में लोगो ने अलविदा जुमा की नमाज़ अदा की। मालूम हो कि रमजान उल मुबारक का 27वां रोजा मुकम्मल हो चुका है। एक माह तक चलने वाले बा-बरकत व रहमत का माह अब रुखसत हो रहा है। रमजान के अंतिम अशरा में लोग ज्यादा समय इबादत में लगा रहे हैं, लोगों का मानना है कि इस माह में इबादत करने से उनके सारे अगले पिछले गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। विभिन्न मस्जिदों में नमाजियों को संबोधित करते हुए ऑलमाओं।ने कहा की रोजेदार का बड़ा सवाब आया है और अल्लाह ताअला के नजदीक रोजेदार का बड़ा दर्जा है। उन्होंने कहा कि प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया है कि जिसने रमजान के रोजे सिर्फ अल्लाह ताअला के वास्ते सवाब समझ कर रखें, तो उसके अगले पिछले गुनाह बख्श दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जो मुसलमान इतना मालदार हो कि उस पर जकात वाजिब हो तो उसे ईद के दिन सदका देना वाजिब है। उन्होंने कहा कि इसी तरह जब माल पर पूरा साल गुजर जाए तो उसे फौरन जकात अदा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर जकात वाजिब है उन्हें चाहिए कि वे माजूर लोगों को जकात की माल से मदद करें, यही इंसानियत की सबसे बड़ा तकाजा है। अलविदा जुमा के मौके पर काजी-ए- शहर मुफ्ती नसीम कासमी ने मस्जिदे अक्सा असनाबाद में नमाजियों से कहा कि रमजान उल मुबारक महीना हमसे रूखसत हो रहा है। रहमतो, बरकतों वाला यह महीना हमें आपस में प्यार, मोहब्बत और अल्लाह के बताए हुए रास्ते पर चलने की सीख देता है। रमजान के आखिरी अशरे में अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मागनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अल्लाह अपने हर बंदों पर रहम फरमाता है। हदीसे पाक के मुताबिक रजमान-उल-मुबारक के मुकद्दस महीना में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। यह इंसानों के लिए बड़ी सआदत की बात है।


