भास्कर न्यूज|गिरिडीह झालसा के सदस्य सचिव रंजना अस्थाना ने गिरिडीह मंडलकारा का निरीक्षण किया। जिसमें बंदियों और जेल की व्यवस्था की जानकारी ली। साथ ही जेल की आधारभूत संरचना व बंदियों की सुविधाएं बहाल करने का निर्देश जेल अधिकारी को दिया। पैनल अधिवक्ताओं की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए पैनल अधिवक्ता नजरूरल हक, फैयाज अहमद, पुरषोत्तम उपाध्याय व रविकांत को फटकार लगाई ली और उन्हें अपटूडेट रहने का निर्देश दिया। सदस्य सचिव ने जेल में बंद 70 वर्ष से अधिक के बंदियों और उनके केस से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है। साथ ही जो बंदी जानलेवा बीमारी से ग्रसित हैं उनका बीमारी व उससे संबंधित उपचार आदि का ब्यौरा मुहैया कराने को कहा है। जेल के आधारभूत संरचना मसलन, बिजली, पानी, शौचालय, कमरा और कैदियों को मिल रही सुविधा की भी जानकारी ली। जिस पर जेल अधीक्षक हिमानी प्रिया ने कहा कि जेल की आधारभूत संरचना से जुड़ी 45 योजनाओं के जीर्णोद्धार व नवनिर्माण के लिए सरकार को रिपोर्ट भेजी गई है। मौके पर जेल के बंदियों में से महिला व पुरूषों में कौशल विकास के साथ व्यावसायिक रूप से प्रशिक्षित करने पर जोर दिया गया। ताकि बंदी जेल से बाहर निकलें भी तो वह अपने कौशल विकास के जरिए अपना रोजगार कर सके। इसमें महिलाओं के लिए ब्यूटीशियन, सिलाई आदि को प्रशिक्षण दिया जाएगा, तो पुरुष बंदियों को कम्प्यूटर में डिप्लोमा, इलेक्ट्रिक, प्लंबर, कारपेंटर, मोबाइल रिपेयरिंग से जुड़ी प्रशिक्षण दे कर उनका कौशल विकास किया जाएगा। ताकि वे जेल में रहकर और जेल से बाहर जाने के बाद भी स्वरोजगार कर जीविकोपार्जन कर सकें। निर्देशों का अक्षरश: अनुपालन होगा : हिमानी इधर, जेल अधीक्षक हिमानी प्रिया ने कहा कि झालसा सेक्रेट्री कुमारी रंजना स्थाना का जेल विजिट महत्वपूर्ण रहा। व्यवस्था के तौर पर उनका जो भी निर्देश मिला है, जेल प्रबंधन उसका अक्षरश: अनुपालन करेगी। वैसे भी जेल में जो कमियां है उस बाबत पहले ही विभाग को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इसके अलावा कौशल प्रशिक्षण पर तैयारी शुरू कर दी गयी है। इग्नु से भी संपर्क किया गया है, जहां से बंदियों को उनकी योग्यता के अनुरूप डिग्री भी मिलेगी।


