निगम क्षेत्र में टोल वसूली पर हाईकोर्ट की रोक, फिर भी वसूली जारी

भास्कर न्यूज|गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश के लिए टॉल वसूली पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय ने निर्णय में साफ तौर पर कहा है कि निगम को व्यवसायिक वाहनों से कर वसूली का कोई अधिकार नहीं है। लिहाजा गिरिडीह निगम को कर वसूली के लिए अगले आदेश तक रोक लगाने का आदेश दिया गया है। उच्च न्यायालय ने यह आदेश मोंगिया स्टील के अधिकृत कर्मी के रीट पिटीशन नंबर 3012/2024 पर दिया है। रीट में झारखंड सरकार म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर गिरिडीह, एडमिनिस्ट्रेटर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन गिरिडीह, उपायुक्त गिरिडीह, सदर एसडीओ गिरिडीह और टोल वसूली ठेकेदार प्रोपराइटर सुमन कुमार राय को पार्टी बनाया गया था। मुकदमे की सुनवाई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रामचंद्र राव और न्यायाधीश दीपक रोशन ने की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया, अधिवक्ता शिल्पी शांडिल्य गाड़ोदिया थे। हालांकि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी गुरुवार को गिरिडीह में कर वसूली जारी रहा। छोटे-बड़े वाहनों से निगम क्षेत्र की सीमा पर छह स्थानों पर ठेकेदार के कर्मी प्रवेश शुल्क वसूलते रहे। वहीं इस मामले पर उप नगर आयुक्त प्रशांत लायक ने कहा कि उन्हें कोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं मिली है। ना तो इसकी जानकारी विभाग के अधिवक्ता ने दी है और ना ही याचिकाकर्ता या उनके वकील ने ही आदेश की प्रति उपलब्ध कराई है। इस संबंध में उन्होंने विभाग के अधिवक्ता को आदेश की प्रति देने को कहा है। आदेश में न्यायाधीश ने कहा है कि संविधान द्वारा सातवीं अनुसूची में सूची II का 52 (101वां) संशोधन अधिनियम, 2016 के तहत उत्तरदाताओं के पास स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर रोक लगाने की कोई शक्ति नहीं है। लेकिन दाखिल दस्तावेज के मुताबिक कर वसूले जाने की पुष्टि हुई है। कानून के अधिकार के बिना और इस तरह कर लेना भारत के संविधान के अनुच्छेद 265 का उल्लंघन है। प्रतिवादी को कोई कर संग्रह नहीं करना है। वाणिज्यिक वाहन प्रवेश शुल्क के नाम पर राशि वसूली पर अगले आदेश तक रोक लगाया जाता है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *