म्यूटेशन की प्रक्रिया में तेजी लाने के दिए गए हैं निर्देश : जिला अपर समाहर्ता

दाखिल खारिज के मामलों के निष्पादन के लिए सरकार की ओर से लोगों की सुविधा के मद्दे नजर सुओ मोटो सिस्टम लागू की गई है। जिसके तहत जमीन की रजिस्ट्री करने पर इस सिस्टम के तहत इसके खरीदार के नाम से दाखिल खारिज को लेकर निबंधन कार्यालय के मार्फत ही संबंधित अंचल के अंचला अधिकारी के लॉगिन में मामले को भेज दिया जाता है। ताकि जमीन की खरीदारी करने वाले व्यक्ति के नाम से दाखिल खारिज आसान तरीके से हो जाए। इस सिस्टम के आंकड़ों पर गौर करें तो इसके लागू होने के पश्चात जिले में कुल 10,701 आवेदन जिले के विभिन्न अंचलों के अंचलाधिकारी के लॉगिन में भेजा गया। जिसमें अब तक 5422 मामलों का निष्पादन किया गया है। जबकि 4133 मामलों को रिजेक्ट कर दिया गया है। वहीं वर्तमान में कुल 1146 आवेदन विभिन्न अंचलों में लंबित पड़े हैं। दाखिल खारिज के निष्पादन को लेकर जिले के अंचल कार्यालय पर नजर डाले तो अब तक जिले के 6 अंचलों में कुल 82 हजार 646 आवेदन दिए गए हैं। जिसमें आधे से कुछ अधिक 42,211 आवेदनों को त्रुटि बताकर रिजेक्ट कर दिया गया है। कुल पड़े आवेदनों में 38102 मामलों का ही निष्पादन किया गया है। वर्तमान में कुल 2333 मामले लंबित बताए गए हैं। इनमें 30 दिन से अधिक समय से बिना कोई आपत्ति के लंबित पड़े मामलों की संख्या 379 है। वही आपत्ति वाले 90 दिन से अधिक समय से लंबित आवेदनों की संख्या 223 बताई गई है। सरकार की ओर से दाखिल खारिज के मामले के निपटारे को लेकर निर्धारित समय सीमा के तहत बिना आपत्ति वाले मामलों का 30 दिनों में निष्पादन के अलावे आपत्ति वाले आवेदनों का 90 दिनों के अंदर निष्पादन कर दिए जाने का निर्देश दिया गया है। इसके बावजूद भी काफी संख्या में मामले निर्धारित समय अवधि के बाद भी लंबित पड़े हैं। भास्कर न्यूज|कोडरमा झारखंड सरकार की ओर से दाखिल खारिज के मामले के निष्पादन के लिए समय सीमा के निर्धारण के अलावा जमीन की खरीदारी करने पर सुओ मोटो सिस्टम के आधार पर इसके खरीदार के नाम से दाखिल खारिज करने की सिस्टम लागू की गई है। मगर अंचल कार्यालय की ओर से लगातार सरकार के इन दिशा निर्देशों की अवहेलना करते हुए इससे संबंधित अधिकांश मामलों को लंबित रखा जाता है ।साथ ही अंतिम समय में इसे रिजेक्ट कर दिया जाता है। जबकि रिजेक्ट करने वाले कई ऐसे मामले होते हैं जिनमें मामूली त्रुटियां होती हैं। इन त्रुटियों को आवेदक को इसकी जानकारी देकर इसका निराकरण किया जा सकता है। इधर दाखिल खारिज कराना लोगों के लिए शुरू से ही काफी परेशानियों का सबब रहा है। लोगों को इसके लिए कई बार अंचल कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। वही इसके लिए उन्हें नाजायज रूप से चढ़ावा भी चढ़ाना पड़ता है। सूत्रों की माने तो बिना चढ़ावा चढ़ाए दाखिल खारिज कराया जाना लोगों के लिए संभव नहीं हो पता है। हालांकि जिला स्तर पर लोगों को सुगमता के साथ दाखिल खारिज के मामलों का निष्पादन किया जा सके। इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग की जाती रही है। इस मामले में जिला अपर समाहर्ता पूनम तिर्की ने बताया कि दाखिल खारिज के मामलों के निर्धारित समय सीमा के अंदर निष्पादन को लेकर सभी अंचलाधिकारियों को लगातार निर्देशित किया जाता रहा है। फिलहाल सर्वर में प्रॉब्लम के कारण मामले के निष्पादन में दिखाते आ रही थी। जिसका समाधान किया जा रहा है। सभी अधिकारियों को काम में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है ।

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