बाड़मेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने बुधवार को लोकसभा सदन में नियम 377 के तहत केंद्र सरकार का ध्यान जिले की लिग्नाइट खदानों से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं की ओर आकर्षित किया। बेनीवाल ने प्राइवेट कंपनी जेएसडब्लू समूह पर अवैध खनन, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए। जालीपा कपूरड़ी खदानों के संदर्भ में पारदर्शिता की कमी कैग रिपोर्ट की अनदेखी, हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना, स्थानीय समुदायों के अधिकारों के हनन जैसे मुद्दे उठाए। सरकार इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप और सख्त कार्रवाई की मांग की। JSW समूह पर अवैध खनन और अतिक्रमण के आरोप सांसद बेनीवाल ने कहा- JSW समूह की ओर से बाड़मेर की जालीपा और कपूरड़ी लिग्नाइट खदानों को नियमों का उल्लंघन करते हुए निजी कंपनियों को सौंपा गया है। उन्होंने आरोप लगाया- इन खदानों के आवंटन में पारदर्शिता का अभाव रहा और सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा, JSW समूह पर सरकारी भूमि, गैर-मुमकिन, नाडी, ओरण और गोचर भूमि पर अतिक्रमण कर अवैध खनन करने का भी आरोप है। इससे न केवल पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है, बल्कि स्थानीय समुदायों में भी गहरा असंतोष व्याप्त है। कैग रिपोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी उम्मेदाराम बेनीवाल ने बताया- कैग की रिपोर्ट में खदान आवंटन, खनन प्रक्रिया और हज़ारों करोड़ राजस्व हानि को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। साथ ही, हाईकोर्ट के निर्देशों का भी पालन नहीं किया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि प्रभावशाली कंपनियों को खुली छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। ग्रीन बैल्ट का अभाव और NGT नियमों का उल्लंघन सांसद ने पर्यावरणीय प्रभावों पर चिंता जताते हुए कहा कि अवैध खनन के कारण ग्रीन बैल्ट का अभाव, जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव और वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है। उन्होंने बताया – लिग्नाइट खनन के दौरान पानी का छिड़काव नहीं होने से कोयले की धूल हवा में फैल रही है। जिससे हेल्थ जोखिम बढ़ गए हैं। इसके बावजूद, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की जा रही है। सांसद ने मांग की कि हर साल एक लाख पौधे लगाने के लक्ष्य की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन किया जाए। CSR और स्थानीय समुदायों के प्रति लापरवाही बेनीवाल ने कहा- JSW समूह पर कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत किए गए वादों को पूरा न करने का भी आरोप लगाया। सांसद ने बताया कि भूमि अधिग्रहण के दौरान खातेदारों को स्थायी रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन यह पूरा नहीं हुआ। CSR फंड से स्थानीय क्षेत्र के विकास और सामाजिक उत्थान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इसके अलावा, विस्थापित लोगों के पुनर्वास की कोई उचित योजना नहीं बनाई गई। शिक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं पर असर सांसद ने खदानों के प्रभाव से शिक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं पर पड़ रहे असर को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मेराथो की ढाणी और मेट खान (कपूरड़ी) में राजकीय स्कूलों के भवन निर्माण का कार्य अधूरा पड़ा है। साथ ही, सार्वजनिक भवनों और स्थलों के पुनर्वास के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि स्थानीय सड़कों, पेयजल, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास सुनिश्चित किया जाए। सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने केन्द्र सरकार से मांग करते हुए कहा बाड़मेर लिग्नाइट/कोयला खदानों के आवंटन व खनन नियमों की कड़ी निगरानी की जाए। केन्द्र सरकार से मांग करते हुए कहा बाड़मेर लिग्नाइट/कोयला खदानों के आवंटन व खनन नियमों की कड़ी निगरानी और समीक्षा की जाए। ताकि स्थानीय समुदायों और पर्यावरण पर होने वाले नकारात्मक प्रभावों को रोका जा सके।सरकार को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर उचित कदम उठाने होंगे और सख्त कानूनी कार्रवाई हो ताकि स्थानीय जनता और पर्यावरण की रक्षा हो सके।


