शहर के आत्मानंद स्कूलों में प्रवेश के लिए 10 अप्रैल से आवेदन की प्रक्रिया शुरु हो जाएगी। इसकी सूचना जारी कर दी गई है। शहर में 5 आत्मानंद स्कूल ऐसे भी हैं, जहां के प्राचार्य आने वाले सत्र से कक्षाएं बढ़ाने को तैयार नहीं हैं। क्योंकि किसी में बच्चों को बिठाने के लिए कमरे नहीं हैं। किसी में टीचर नहीं है। किसी स्कूल में बेंच नहीं है। इन स्कूलों में किसी में 8वीं तो किसी में 9वीं-10वीं तक की कक्षाएंं चल रही है। इस सत्र से कक्षाएं बढ़नी थी ताकि छात्रों को आगे की कक्षाओं में पढ़ाई कराई जा सके। कमियों का हवाला देकर प्राचार्यों ने कक्षाएं बढ़ाने से मना कर दिया है। ऐसे में वहां पढ़ाई करने वाले छात्र अधर में लटक गए है। भास्कर को उन स्कूलों की जानकारी मिलने के बाद पड़ताल की गई। इस दौरान पता चला कि आत्मानंद स्कूलों का क्रेज देखकर पिछली सरकार ने 2023 में सत्र के बीच में 5 स्कूलों को अचानक आत्मानंद में तब्दील कर दिया गया। सत्र के बीच में स्कूल शुरु करने का आदेश सरकार ने दे तो दिया लेकिन इन स्कूलों में न तो पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की गई और ना ही पर्याप्त संख्या में क्लास रुम बनाए गए हैं। गुढ़ियारी, उधार के कमरे में चल रहा : गुढ़ियारी स्थित शशिबाला स्कूल को सत्र के बीच में आत्मानंद करने की घोषणा कर दी गई। भवन नहीं होने के कारण स्कूल प्रबंधन ने उस सत्र में आत्मानंद शुरु नहीं किया था। 2024-25 में स्कूल को आत्मानंद तो किया गया लेकिन कक्षाएं नहीं होने के कारण जनता कॉलोनी स्थित प्रायमरी स्कूल भवन के कमरों में शुरू किया गया। भास्कर टीम स्कूल पहुंची तो पता चला यहां अभी 8वीं तक बच्चे पढ़ रहे हैं। लेकिन इस साल जो आठवीं में हैं वे 9वीं में जाएंगे, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने आगे की क्लास शुरू करने से मना कर दिया है। क्योंकि स्कूल का भवन ही नहीं बना है। त्रिमूर्ति नगर, प्राइमरी के शिक्षक नहीं 2023 में जब अचानक इसे शुरू किया तब 8वीं तक कक्षाएं शुरू की गईं। इस सत्र से 10वीं की कक्षाएं शुरू होनी थी। लेकिन 10वीं कक्षा के लिए रूम ही नहीं है। स्कूल से जुड़े लोगों ने बताया कि कक्षाएं नहीं रहेंगी तो बच्चों को कहां पढ़ाएंगे। जब तक कमरे नहीं बनेंगे कक्षाएं नहीं बढ़ाई जाएंगी। सप्रे स्कूल, दबाव में शुरू की 10वीं शुरूआत में यहां केवल 9वीं तक की पढ़ाई शुरु की गई। 2024-25 में विभाग के दबाव के बाद 10वीं की कक्षाएं चालू की गई। अब आने वाले सत्र में 11वीं के बच्चों को बिठाने के लिए यहां पर्याप्त कमरे नहीं हैं। स्कूल प्रबंधन कक्षाएं बढ़ाने को लेकर चुप है। इससे बच्चों के पैरेंट्स परेशान हैं। भनपुरी, जमीन पर पढ़ रहे बच्चे यहां बीच सत्र में जैसे तैसे स्कूल तो चालू किया गया, लेकिन न फर्नीचर मिला न टीचर। दो सत्र गुजरने के बाद भी आधे बच्चों के लिए ही बैठने की व्यवस्था हो सकी है। भास्कर टीम जब यहां पहुंची तो पता चला ये स्कूल भनपुरी के प्रायमरी स्कूल में उधार के कमरों में चल रहा था। परिजनों के विरोध के बाद गंगानगर स्थित नए भवन में स्कूल शिफ्ट किया। पर बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हुई। अभी यहां 9वीं तक कक्षाएं लग रही हैं। अब यहां 10वीं के छात्रों को बिठाने के लिए जगह ही नहीं है। आत्मानंद स्कूलों की समस्याओं को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही इनमें सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। – विजय खंडेलवाल, जिला शिक्षा अधिकारी, रायपुर।


