झारखंड सरकार ने केंद्रीय प्री-बजट बैठक में फिर 1.36 लाख करोड़ रुपए बकाए का मुद्दा उठाया। साथ ही केंद्रीय बजट 2025-26 में यह राशि देने की व्यवस्था करने की मांग की। शुक्रवार को राजस्थान के जैसलमेर में केंद्रीय वित्त मंत्री की उपस्थिति में हुई बैठक में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बजट सुझाव के साथ मांग पत्र भी सौंपा। मांग पत्र में बकाया राशि की मांग करते हुए कहा गया है कि अर्धविकसित झारखंड के संपूर्ण विकास के लिए राज्य सरकार के पास बहुआयामी योजना के साथ विजन भी है। लेकिन राज्य अपने आय के आंतरिक स्रोतों से इसे पूरा करने में असमर्थ है। जनजाति बाहुल्य राज्य के सर्वांगीण विकास में केंद्र सरकार का आर्थिक सहयोग जरूरी है। इसलिए केंद्र सरकार वॉश्ड कोल रॉयल्टी का 2900 करोड़, कॉमन कॉज का 32 हजार करोड़ और भूमि मुआवजा मद में 1 लाख 1 हजार 142 करोड़ रुपए की बकाया राशि झारखंड को उपलब्ध कराए। राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार से रांची-कोलकाता और रांची-पटना एक्सप्रेस-वे बनाने की मांग भी रखी। कहा- उग्रवाद प्रभावित झारखंड में विशेष सहायता पांच सालों के लिए उपलब्ध कराई जाए। जानिए… झारखंड ने इन क्षेत्रों में मांगी मदद परिवहन: झारखंड खनिज आधारित राज्य है। अधिकतर खनिजों की ढुलाई सड़क मार्ग से होती है। लेकिन सड़क के मामले में झारखंड देश की तुलना में काफी पीछे है। यहां प्रति हजार वर्ग किमी में 186.69 किमी सड़क ही उपलब्ध है, जबकि राष्ट्रीय औसत 500.84 वर्ग किमी है। इसे राष्ट्रीय औसत पर लाने के लिए केंद्र से मदद की जरूरत है। जिन सड़कों का निर्माण 10 साल पहले हुआ है, उसकी मरम्मत भी केंद्र के स्तर पर हो।चतरा, गुमला और सिमडेगा जिला मुख्यालय को रेल से जोड़ने की जरूरत है। रांची व देवघर को देश के बड़े महानगरों से जोड़ने के लिए हवाई सेवा उपलब्ध कराई जाए। जल संकट: राज्य में भूगर्भ जलस्तर खतरनाक ढंग से नीचे जा रहा है। राज्य में स्वर्णरेखा, उत्तर कोयल, दामोदर, बराकर, मयूराक्षी जैसे 11 नदी बेसिन हैं। इन नदी बेसिन के माध्यम से जल संसाधन की योजना के अभाव के कारण सतही और भूगर्भीय जल में ह्रास हो रहा है। केंद्र सरकार इन नदियों के जल संग्रहण के लिए आर्थिक पैकेज देकर जल संकट को दूर करे। पर्यटन: पलामू प्रमंडल के बेतला नेशनल पार्क, गारू, महुआटांड, नेतरहाट और रांची को पर्यटन सर्किल से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार का सहयोग जरूरी है। इस पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने से जहां स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं राजस्व भी मिलेगा। सामाजिक सुरक्षा पेंशन: सामाजिक सुरक्षा के तहत केंद्र प्रायोजित योजना इंदिरा गांधी वृद्धावस्था पेंशन, इंदिरा गांधी दिव्यांग पेंशन, इंदिरा गांधी विधवा पेंशन योजना में वर्ष 2012 से केंद्र सरकार द्वारा क्रमशः 200 रुपए, 300 रुपए तथा 300 रुपए की दर से पेंशन राशि दी जाती है। इसे बढ़ाने की जरूरत है। पशुपालन: राधाकृष्ण ने कहा कि झारखंड में प्रति वर्ष 26.29 लाख मीट्रिक टन दूध का उत्पादन होता है। जबकि राष्ट्रीय औसत 2211 लाख मीट्रिक टन है। यहां प्रतिदिन प्रति व्यक्ति को सिर्फ 195 ग्राम दूध उपलब्ध होता है। वहीं राष्ट्रीय औसत प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 444 ग्राम है। इसलिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए दूध उत्पादन, मत्स्य व पशुपालन प्रक्षेत्र में केंद्र सरकार का सहयोग जरूरी है। स्वास्थ्य: जनजातीय कुपोषण एवं स्वास्थ्य के साथ-साथ राज्य कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। यहां राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय स्वास्थ्य नीति की जरूरत है। आदिवासी बाहुल्य खूंटी, गुमला ओर सिमडेगा जिले के बीच में एक उच्च कोटि के मेडिकल कॉलेज की जरूरत है। यह संस्था आदिवासी समुदाय के परंपरागत औषधि पर भी विशेष शोध कर सकेगा। झारखंड सरकार एक विश्वस्तरीय ट्राइबल यूनिवर्सिटी बनाएगा। इसके लिए भी केंद्र से सहयोग चाहिए। सूखे का दंश झेल रहे पलामू के मेदिनीनगर में कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए केंद्र के मदद की जरूरत है। यहां रेल लाइन की जरूरत…


