मुख्य अतिथि प्रो. विज ने अपने संबोधन में कहा कि ई-वाहन न केवल वायु प्रदूषण को कम करेंगे, बल्कि खेती को पर्यावरण हितैषी भी बनाएंगे। उन्होंने बैटरियों के सुरक्षित निपटान की जानकारी पर जोर दिया और वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की। डॉ. कोतवालीवाले ने किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद की आवश्यकता बताई, ताकि व्यवहारिक नवाचारों को बढ़ावा मिल सके। डॉ. मंजीत सिंह ने कहा कि इलेक्ट्रिक फार्म मशीनरी आने वाले समय की जरूरत है, जो खेती को स्मार्ट और सुरक्षित बनाएगी। इस अवसर पर मशीनों का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिसमें किसानों ने प्रत्यक्ष अनुभव साझा किए। साथ ही एमएसएमई, कृषि तकनीकी कंपनियों और वैज्ञानिकों के साथ संवाद के जरिए प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण पर चर्चा हुई। यह प्रदर्शनी 28 फरवरी को विज्ञान भवन, दिल्ली से शुरू हुई थी और 11 शहरों में भ्रमण करते हुए कन्याकुमारी में समाप्त होगी। सीएसआईआर-सीएमईआरआई का यह प्रयास आत्मनिर्भर भारत और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में मील का पत्थर है। किसानों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत को इसमें भागीदारी के लिए आमंत्रित किया गया है ताकि भारत का कृषि भविष्य स्वच्छ, स्मार्ट और समृद्ध बन सके। भास्कर न्यूज। लुधियाना सीएसआईआर-सीएमईआरआई, दुर्गापुर द्वारा विकसित ई-ट्रैक्टर और ई-टिलर का अनावरण 9 शहर में किया गया। यह तकनीकी नवाचार भारत के कृषि क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त और टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन प्रो. आदर्श पाल विज, आईसीएआर-सिफेट के निदेशक डॉ. नचिकेत कोतवालीवाले और पीएयू के कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज के डीन डॉ. मंजीत सिंह मौजूद रहे। कार्यक्रम की मेजबानी सीएसआईआर-सीएमईआरआई के निदेशक डॉ. नरेश चंद्र मुर्मू ने की। सीएसआईआर-सीएमईआरआई के ई-ट्रैक्टर प्राइमा ईटी11 और ई-टिलर को खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए तैयार किया गया है। ये मशीनें डीजल के बजाय बिजली से चलती हैं, जिससे प्रदूषण नहीं होता और रखरखाव भी आसान होता है। इनमें कंपन कम है, महिलाएं भी आसानी से चला सकती हैं और इनका संचालन अधिक किफायती है। डॉ. मुर्मू ने कहा कि यह कदम कृषि में स्वच्छ तकनीक को बढ़ावा देने और किसानों को टिकाऊ समाधान देने की दिशा में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।


