भास्कर न्यूज | अंबिकापुर राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय मेडिकल कॉलेज के वायरोलॉजी लैब में शासन की अनुमति के बिना पद से चार गुना अधिक संविदाकर्मियों की भर्ती मामले में डीन ने जांच के निर्देश दिए हैं। मामले की जांच के लिए डीन ने छह सदस्यीय समिति बनाई है। मामले को लेकर छग प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री अनिल पांडेय ने शिकायत की थी। इन कर्मचारियों की नियुक्ति आदेश को प्रबंधन ने एक साल के लिए और बढ़ा दिया था। इसके बाद पांडेय ने डीन को ज्ञापन सौंपकर नियुक्ति पर सवाल उठाए थे। मामला सामने आने के बाद डीन डॉ. अविनाश मेश्राम ने एक आदेश जारी कर कर्मचारियों के सेवावृद्धि को निरस्त कर दिया था। आरोप है कि प्रबंधन द्वारा कोरोनाकाल में वायरोलॉजी लैब में स्वीकृत 7 पद की जगह अलग-अलग 33 पदों पर संविदा कर्मचारियों की भर्ती की गई। इसमें क्लीनिकल माइक्रोबायोलाजिस्ट, सीनियर साइंटिस्ट, जूनियर रिसर्च साइंटिस्ट, लैब टेक्निशियन डाटा एंट्रीआपरेटर, लैब अटेंडेंट के एक एक पद शामिल थे। इनकी जगह जरूरत बताकर 33 पदों पर संविदा भर्ती कर दी गई है और हर साल इनकी सेवाएं बढ़ाती जा रही थी। जबकि शासन से इसे लेकर कोई अनुमति नहीं ली गई थी। कोरोनाकाल से की गई थी भर्ती वायरोलॉजी लैब में कोरोना संक्रमण के समय कर्मचारियों की जरूरत थी। तब प्रबंधन ने लैब में कामकाज के लिए एक-एक विभिन्न पदों पर संविदा नियुक्ति की। इनकी फिर सेवा अवधि भी बढ़ाई जाती रही। आरोप है कि इन कर्मचारियों का मानदेय नियमित कर्मचारियों के वेतन मद से भुगतान किया जा रहा है। साथ ही हर साल इनकी सेवावृद्धि की जाती है। इससे हर माह पद से चार गुना ज्यादा कर्मचारियों को मानदेय भुगतान किया जाता रहा। समिति में इन सदस्यों को किया गया है शामिल मामले की जांच के लिए जो समिति बनाई गई है, उसमें निश्चेतना विभाग के एचओडी डॉ. राकेश निगम, अस्थि रोग विभाग के एचओडी डॉ. अरूणेश सिंह, कम्यूनिटी मेडिसीन से एचओडी डॉ. आभा एक्का, सर्जरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. मनोज भारती, प्रशासकीय अधिकारी जगदीश प्रसाद सिंह व विमल कुमार एक्का शामिल हैं। डीन ने समिति के सदस्यों को मामले की सूक्ष्मता से जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा है।


