उदयपुर में स्प्लेंडर चुराने वाली गैंग पकड़ी, हिस्ट्रीशीटर भी शामिल:पूछताछ में बोले- इसका लॉक आसानी से टूट जाता है; 26 मोटरसाइकिल और 1 स्कूटी बरामद

उदयपुर की भूपालपुरा थाना पुलिस ने दुपहिया वाहन चुराने के आरोप में एक हिस्ट्रीशीटर सहित 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस गैंग से 26 बाइक और एक स्कूटी बरामद की है। गैंग से जुड़े बदमाश स्प्लेंडर बाइक ज्यादा चुराते थे, क्योंकि इसकी लॉक आसानी से टूट जाती है। फिर इन्हें गांवों में ले जाकर सस्ते दामों में बेच देते थे। आरोपियों ने 3 माह पहले गैंग बनाई थी। चोरी की बाइक के साथ आरोपी गिरफ्तार एसपी योगेश गोयल ने बताया कि पाठों की मगरी, सेवाश्रम निवासी अजयसिंह देवड़ा ने बीते माह 11 मार्च को थाने में रिपोर्ट दी थी। जिसमें बताया कि 8 मार्च को दोपहर 2 बजे घर के बाहर बाइक खड़ी की थी। कुछ देर बार वे बाहर आए तो बाइक नहीं थी। काफी तलाशने के बाद बाइक नहीं मिली। पुलिस ने बताया कि मामले को लेकर दो टीमें गठित की गई। घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरों को खंगाला गया। जांच के दौरान खेरोदा निवासी देवीलाल रावत को अजय की चोरी हुई बाइक के साथ गिरफ्तार किया गया। 26 मोटरसाइकिल 1 स्कूटी बरामद पूछताछ में देवीलाल ने बताया कि उसकी गैंग में खेरोदा निवासी शिवलाल भील, लक्ष्मण भील, गोवर्धन विलास निवासी लक्ष्मण मीणा, मंगलवाड़ निवासी रवि खटीक और कपासन निवासी ओमप्रकाश भी जुड़े हैं। इसी आधार पर पुलिस ने इन आरोपियों को भी गिरफ्तार किया। पुलिस ने इनसे 26 बाइक और एक स्कूटी बरामद की है। इनमें से 10 बाइक भूपालपरा थाना क्षेत्र से, 8 हिरणमगरी से, 2 सूरजपोल से, एक-एक सांवरियाजी, डबोक, वल्लभनगर और प्रतापनगर थाना क्षेत्र से चुराई है। पुलिस आरोपियों से आगे पूछताछ कर रही है। सुनसान जगह से चोरी करते, फिर गांवों में सस्ते दाम में बेचते
पूछताछ में सामने आया कि देवीलाल रावत गिरोह का सरगना है। इसका साथी रवि खटीक मंगलवाड़ थाने का हिस्ट्रीशीटर है। इसके खिलाफ 7 मामले दर्ज हैं। ओमप्रकाश मंगलवाड़ थाने में चोरी और बारां के एक एनडीपीएस मामले में वांटेड है। लक्ष्मण भील पर एक केस दर्ज है। इन चारों ने गिरोह बनाया। इसमें शिवलाल और लक्ष्मण भील को भी शामिल किया गया। ये पिछले चार महीने से बाइकें चुरा रहे थे। इन्होंने सबसे ज्यादा 22 स्प्लेंडर बाइक चुराई। इसका कारण आसानी से लॉक टूट जाना बताया। इन्हें सुनसान जगहों और घरों के बाहर से चुराते थे। फिर गांवों में ले जाकर सस्ते दामों में बेच देते थे।

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